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Israel Election: बहुमत नहीं मिला तो कौन चलाएगा इजरायल की सरकार? जानें नेतन्याहू की वापसी पर क्यों है सस्पेंस, कौन बन सकता है 'किंगमेकर'

Israel General Election Result: इजरायल के आम चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 26 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है, लेकिन उनका गठबंधन बहुमत से दूर है। अरब दलों की 19 सीटें सरकार गठन में निर्णायक हो सकती हैं। वहीं, विपक्षी नेताओं के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है, जबकि एविगडोर लिबरमैन ने नेतन्याहू और अहमद टिबी, दोनों के साथ जाने से इनकार किया है।

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Israel Election Result: नेतन्याहू बहुमत से दूर, जानें 19 सीटों वाले अरब दल कैसे बन सकते हैं किंगमेकर

Photo : AP

Israel General Election Result: इजरायल के आम चुनाव नतीजों ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच ली है। चुनाव रिजल्ट सामने आने के बाद कोई साफ विजेता दिख नहीं रहा। प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू अपने प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट से आगे चल रहे हैं, लेकिन संसद में बहुमत हासिल करने से अभी भी दूर हैं।

चुनाव के बाद क्या है सीटों का गणित?

91.1 प्रतिशत वोटों की गिनती के साथ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड 26 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि उनके गठबंधन के पास 53 सीटें हैं, जो 120 सदस्यों वाली नेसेट में बहुमत के लिए ज़रूरी 61 सीटों से कम है।

यहूदियों के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को 48 सीटें मिली हैं, जबकि अरब पार्टियों जॉइंट लिस्ट और रा'म के पास क्रमशः 12 और 7 सीटें हैं, जिससे नेतन्याहू-विरोधी पार्टियों की कुल संख्या 67 हो गई है। वोटिंग 77.7 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो 2022 में 70.6 प्रतिशत थी।

बहुमत नहीं मिला तो कौन चलाएगा सरकार?

अगर नई सरकार का गठन तुरंत नहीं हो पाता, तो मौजूदा सरकार कार्यवाहक सरकार (Caretaker Government) के रूप में काम करती रहेगी। इसका मतलब है कि चुनाव में बहुमत नहीं मिलने से प्रधानमंत्री का पद अपने आप खाली नहीं हो जाता।

ऐसी स्थिति में नेतन्याहू नई सरकार बनने तक प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां निभाते रह सकते हैं। कार्यवाहक सरकार प्रशासन और शासन का काम जारी रखती है, जबकि राजनीतिक दल नई सरकार बनाने के लिए बातचीत करते हैं।

हालांकि, लंबे समय तक राजनीतिक गतिरोध रहने से सरकार की नीतियों और संसद के कामकाज पर असर पड़ सकता है।

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इजरायल में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं।

सरकार गठन में राष्ट्रपति की क्या भूमिका होगी?

इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग सरकार गठन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चुनाव रिजल्ट आने के बाद राष्ट्रपति संसद में प्रतिनिधित्व पाने वाली पार्टियों के नेताओं से सलाह-मशविरा करते हैं। इसके बाद वह किसी सांसद को सरकार बनाने का मौका देते हैं। जरूरी नहीं कि यह मौका केवल सबसे बड़ी पार्टी के नेता को ही मिले। राष्ट्रपति इस बात पर भी विचार करते हैं कि किस नेता के पास बहुमत जुटाने की बेहतर संभावना है।

सरकार बनाने का मौका मिलने वाले नेता को शुरुआत में 28 दिन का समय दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति इस अवधि को अधिकतम 14 दिन तक बढ़ा सकते हैं।

अगर पहली कोशिश नाकाम हुई तो क्या होगा?

अगर पहला नेता सरकार बनाने में असफल रहता है, तो राष्ट्रपति किसी दूसरे सांसद को मौका दे सकते हैं। दूसरे उम्मीदवार को सरकार बनाने के लिए 28 दिन मिलते हैं। अगर दूसरी कोशिश भी नाकाम रहती है, तो कम से कम 61 सांसद किसी तीसरे उम्मीदवार के नाम पर सहमत होकर उसे सरकार बनाने का मौका दिलाने की कोशिश कर सकते हैं। इस उम्मीदवार को 14 दिन का समय मिल सकता है।

अगर इन कोशिशों के बावजूद कोई सरकार नहीं बनती, तो संसद भंग होने और नए चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। इस बीच कार्यवाहक सरकार शासन संभालती रहेगी।

क्या नेतन्याहू और विपक्ष मिलकर सरकार बना सकते हैं?

राजनीतिक गतिरोध खत्म करने का एक विकल्प व्यापक गठबंधन या एकता सरकार भी हो सकता है। इसमें नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और विपक्ष के कुछ दल एक साथ आ सकते हैं। लेकिन ऐसा करना आसान नहीं है। नेतन्याहू और विपक्षी नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद हैं। विपक्ष का एक प्रमुख उद्देश्य नेतन्याहू को सत्ता से हटाना रहा है, जबकि नेतन्याहू अपने दक्षिणपंथी सहयोगियों के साथ सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

दूसरी संभावना यह है कि विपक्षी गठबंधन अरब पार्टियों के समर्थन से बहुमत जुटाने की कोशिश करे। लेकिन इस विकल्प में भी राजनीतिक और वैचारिक मतभेद बाधा बन सकते हैं।

अरब दल बन सकते हैं 'किंगमेकर'

शुरुआती चुनावी अनुमानों के अनुसार, अरब दलों को 19 सीटें मिलने की संभावना है। ऐसे में बहुमत से दूर दोनों गठबंधनों के लिए इन दलों का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है। विपक्षी नेता नई सरकार के गठन को लेकर बातचीत की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अरब पार्टियों को गठबंधन में शामिल करने के मुद्दे पर उनके बीच मतभेद हैं। इससे सरकार बनाने की राह मुश्किल हो सकती है।

इजरायल की वामपंथी पार्टी ‘द डेमोक्रेट्स’ के नेता यायर गोलान ने नई सरकार के गठन की संभावनाओं पर चर्चा के लिए विपक्षी नेताओं से मुलाकात करने की बात कही है। वह रविवार तक गादी आइजेनकोट, यायर लैपिड और अन्य नेताओं के साथ बातचीत करने की योजना बना रहे हैं।

गोलान के मुताबिक, विपक्षी नेताओं का साझा उद्देश्य इजरायल के लोगों के बीच उम्मीद जगाना है। वह उन विपक्षी नेताओं में शामिल हैं, जो नई सरकार में अरब दलों को शामिल करने का खुलकर समर्थन कर रहे हैं।

न बीबी, न टीबी के साथ करेंगे गठबंधन: इजरायल बेतेनु पार्टी

इजरायल बेतेनु पार्टी के अध्यक्ष एविगडोर लिबरमैन ने अपनी पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा है कि वह न तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (‘बीबी’) के साथ सरकार बनाएंगे और न ही जॉइंट लिस्ट के नेता अहमद टिबी (‘टिबी’) के साथ किसी गठबंधन का हिस्सा बनेंगे। लिकुड पार्टी के चुनावी नारे की तर्ज पर उन्होंने कहा, “चुनाव से पहले हमने जो कहा था, वह चुनाव के बाद और भी ज्यादा प्रासंगिक है। हम न तो बीबी के साथ बैठेंगे और न ही टिबी के साथ।”

लिबरमैन लंबे समय से इस रुख पर कायम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल नहीं होंगे। साथ ही, वह ऐसी किसी सरकार का समर्थन भी नहीं करेंगे, जिसका अस्तित्व अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर हो। फिलहाल, लिबरमैन इजरायल के राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और सरकार गठन की तस्वीर स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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