दिल्ली : कभी देर रात तक पार्टियों में रहने वाली श्रद्धा दुबे के लिए सलाखों के पीछे का जीवन बेहद कठिन साबित हो रहा है। जेल की सख्त दिनचर्या, फर्श पर बिछे बिस्तर, मच्छरों के आतंक और सुबह छह बजे गिनती के लिए उठने की मजबूरी के बीच उसकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। जेल सूत्रों के मुताबिक, उसे खानपान और सोने-जागने के नए माहौल के साथ तालमेल बिठाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बैरक में बेचैन रातें और टहलकर बिताया समय
दरअसल, लखनऊ के शिवा शर्मा मौत मामले में श्रद्धा दुबे पर कई गंभीर आरोप हैं। परिवार का आरोप है कि शिवा की हत्या की गई है। हालांकि, इस हाईप्रोफाइल मामले में हत्या और आत्महत्या दोनों एंगल पर जांच जारी है। मामले में जेल गई श्रद्धा की रातें काफी तनावपूर्ण गुजर रही हैं। रात में बार-बार नींद खुलने के कारण उसकी परेशानी बढ़ जाती है। देर रात नींद खुलने के बाद वह काफी देर तक बैरक में चुपचाप बैठी रहती है और फिर टहलकर समय बिताती है। बुधवार सुबह बैरक खुलने पर श्रद्धा को अपनी बहन रश्मि के साथ टहलते हुए देखा गया। हालांकि, बहन रश्मि भी ज्यादातर गुमसुम ही नजर आती है, और दोनों बहनें आपस में ही बातचीत करती रहती हैं।
परिजनों की मुलाकात का इंतजार
श्रद्धा को अब अपने परिवार और करीबियों से मिलने का बेसब्री से इंतजार है। जेल प्रशासन को मिलने वाले लोगों के नाम देने के बावजूद अब तक कोई भी परिजन उससे मिलने नहीं पहुंचा है। बीते सात दिनों में तीन वकीलों ने केवल एक बार दोनों बहनों से मुलाकात की है। पुलिस सत्यापन (Police Verification) की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण जेल प्रशासन ने फिलहाल सामान्य मुलाकातों पर रोक लगा रखी है।
महिला बंदियों से जानी जेल से छूटने की प्रक्रिया
कानूनी शिकंजे में फंसी श्रद्धा अब जेल से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने में जुट गई है। बुधवार को उसने बैरक में मौजूद अन्य महिला बंदियों से उनके मुकदमों और कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी ली। अपने मामले का जिक्र करते हुए उसने महिला बंदियों से यह भी पूछा कि इस तरह के मामलों में जेल से छूटने में आमतौर पर कितना समय लग जाता है। इस दौरान महिला बंदियों ने उसे जेल के तौर-तरीकों और मुलाकात की औपचारिकताओं से अवगत कराया।
