इजरायल में हुए आम चुनाव के बाद सामने आए प्रमुख टीवी चैनलों के एग्जिट पोल ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इन शुरुआती रुझानों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को बड़ा झटका लगता दिखाई दे रहा है, जबकि विपक्ष को बढ़त मिलती नजर आ रही है। हालांकि, किसी भी गुट को स्पष्ट बहुमत मिलता हुआ नहीं दिख रहा है, जिससे आने वाले हफ्तों में त्रिशंकु संसद और सियासी जोड़-तोड़ के आसार बन गए हैं। हालांकि, ये केवल शुरुआती अनुमान हैं। इनसे किसी भी गठबंधन की जीत या सरकार बनने की पुष्टि नहीं होती।
प्रमुख इजरायली टीवी चैनलों के एग्जिट पोल के मुताबिक, नेतन्याहू के गठबंधन को करीब 50 सीटें मिलने की संभावना है। वहीं, विपक्ष को लगभग 52 और अरब पार्टियों को करीब 18 सीटें मिलने का अनुमान है। त्रिशंकु जैसे हालात बनने के कारण सरकार के गठन को लेकर पेचीदगियां बढ़ गई हैं। अगर ये आंकड़े सही साबित होते हैं, तो सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों को दूसरे दलों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।
सरकार बनाने के लिए विपक्ष को करनी होगी मशक्कत
एग्जिट पोल में बढ़त के बावजूद विपक्ष के सामने सरकार बनाने की चुनौती बनी हुई है। इजरायल में सरकार बनाने के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाना अहम होगा। इस प्रक्रिया में कई सप्ताह तक बातचीत और राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा चल सकती है। यदि कोई भी गठबंधन सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन नहीं जुटा पाता है, तो देश में दोबारा चुनाव कराने की स्थिति भी बन सकती है।
गादी आइजेनकोट और अरब पार्टियों की भूमिका अहम
नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने की कोशिश कर रहे विपक्ष के सामने भी राह आसान नहीं है। पूर्व सैन्य प्रमुख और नेतन्याहू के कड़े प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट के लिए सरकार बनाने के लिए अरब नेतृत्व वाली पार्टियों का सहयोग हासिल करना अहम हो सकता है। हालांकि, ऐसा गठबंधन बनाना राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और जटिल साबित हो सकता है, जिससे विपक्ष के दूसरे राजनीतिक दलों के बीच आंतरिक मतभेद भी उभर सकते हैं।
अंतिम नतीजों पर टिकी नजर
फिलहाल एग्जिट पोल के आंकड़ों से इजरायल की राजनीति में मुकाबला कड़ा होने के संकेत मिल रहे हैं। नेतन्याहू के गठबंधन और विपक्ष के बीच सीटों का अंतर कम रहने का अनुमान है। अब अंतिम चुनाव परिणामों और राजनीतिक दलों के बीच होने वाली बातचीत से ही स्पष्ट होगा कि अगली सरकार किसकी बनेगी।
