कांग्रेस के ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण गुजरात के आनंद पहुंचे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान के जरिए पार्टी चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोपों को उठा रही है। चव्हाण ने इस दौरान चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठाए।
पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि सरकार विरोध के संवैधानिक अधिकारों को लेकर असहज है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इतनी डरी हुई है कि लोगों को हवाई जहाज से गिरफ्तार किया जा रहा है और सोते समय उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति और विरोध के अधिकारों को छीना नहीं जाना चाहिए।
चुनाव आयोग पर कार्रवाई की मांग
चुनाव आयुक्त के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को लेकर पूछे गए सवाल पर चव्हाण ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 और 136 के तहत सुप्रीम कोर्ट के पास कानूनी कार्रवाई के पर्याप्त अधिकार हैं। उन्होंने कहा कि गंभीर मुद्दों पर पोस्टकार्ड या अखबार में प्रकाशित खबर के आधार पर भी जनहित याचिका अथवा अन्य कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।चव्हाण ने इंडियन एक्सप्रेस में 25 सितंबर को प्रकाशित चुनाव आयोग से जुड़ी खबर का हवाला देते हुए कहा कि उस रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और चुनाव आयुक्त से मिलने का समय मांगा था, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया।उन्होंने कहा कि यदि जनता का आक्रोश बढ़ता है, तो सरकार के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।
महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम का भी किया जिक्र
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए चव्हाण ने कहा कि संवैधानिक महत्व के मामलों में समय पर फैसला होना जरूरी है। उन्होंने महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि विधायकों की खरीद-फरोख्त के बावजूद सरकार लंबे समय तक चलती रही और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अपेक्षित न्याय नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि कई बार फैसला नहीं सुनाना भी अपने आप में एक फैसला बन जाता है। उनके मुताबिक, संवैधानिक महत्व के मामलों में देरी से न्याय मिलने का उद्देश्य प्रभावित होता है।
‘अंपायर फिक्स हो जाए तो मैच का नतीजा पहले से तय’
पृथ्वीराज चव्हाण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर संवैधानिक और जांच एजेंसियों सहित विभिन्न संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करने का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थाओं पर कब्जा करने की स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
क्रिकेट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “अगर अंपायर फिक्स हो जाए, तो क्रिकेट मैच में एक पार्टी का कोई खिलाड़ी आउट ही नहीं होगा।” उन्होंने मौजूदा स्थिति को मैच फिक्सिंग जैसा बताते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की मांग कर रही है। चव्हाण ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा संविधान में स्थापित सिद्धांतों का पालन होना चाहिए। उन्होंने ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ और गणतंत्र बचाओ’ का संदेश दिया।
राजनीतिक विरोध को दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए: चव्हाण
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयानों को लेकर जारी विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए चव्हाण ने कहा कि राजनीति में दलों के बीच मतभेद और संसद में तीखी बहस स्वाभाविक हैं, लेकिन राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए।उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी, चंद्रशेखर, एच.डी. देवगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल के प्रधानमंत्रित्व काल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में भी राजनीतिक दल एक-दूसरे का कड़ा विरोध करते थे, लेकिन आपसी संवाद और व्यक्तिगत संबंध बने रहते थे।
चव्हाण ने आरोप लगाया कि मौजूदा दौर में राजनीतिक संवाद कम हुआ है और विरोधियों के बीच दुश्मनी का माहौल बढ़ा है। उन्होंने सभी राजनीतिक नेताओं से अपील की कि वे युवाओं के सामने बेहतर उदाहरण पेश करें और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के बजाय नीतिगत मुद्दों पर संघर्ष करें।
