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उस दिन कहां हुई थी चूक? हमास अटैक में मोसाद- सेना और सरकार के खिलाफ जांच करेगा आयोग, इजराइली रक्षामंत्री ने की मांग

Hamas Attack on Israel: राष्ट्रीय जांच आयोग एक स्वतंत्र निकाय होगा, जिसकी अध्यक्षता एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। इस आयोग के पास व्यापक शक्तियां होंगी। समिति इस बात पर गौर करेगी कि आखिर उस दिन यानी 7 अक्टूबर को सरकार, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कहां चूक हुई थी।

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इजराइल-हमास संघर्ष

Photo : AP

Hamas Attack on Israel: इजराइल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने हमास के 7 अक्टूबर के हमले की जांच के लिए राष्ट्रीय जांच समिति गठित करने की मांग की है। उनके मुताबिक ये समिति सरकार, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के काम करने के तरीकों की जांच करेगी। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय जांच आयोग एक स्वतंत्र निकाय होगा, जिसकी अध्यक्षता एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। इस आयोग के पास व्यापक शक्तियां होंगी। समिति इस बात पर गौर करेगी कि आखिर उस दिन यानी 7 अक्टूबर को कहां चूक हुई।

इजराइल रक्षा बलों (आईडीएफ) के अधिकारियों के एक समारोह में गैलेंट ने गुरुवार को कहा कि आयोग निष्पक्ष होना चाहिए, इसे हम सभी की जांच करनी चाहिए -सरकार, सेना और सुरक्षा एजेंसियां। इसे मेरी और साथ ही प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, सेना प्रमुख, शिन बेट प्रमुख, आईडीएफ और राष्ट्रीय निकायों की जांच करनी चाहिए। गैलेंट इस हमले की राष्ट्रीय जांच की मांग करने वाले सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं।

हमास अटैक में मारे गए थे 1200 लोग

7 अक्टूबर, 2023 को हजारों हमास आतंकवादियों ने गाजा से इजरायल में हमला कर सबको चौंका दिया था और लगभग 1,200 लोगों की हत्या कर दी थी तथा लगभग 250 अन्य का अपहरण कर लिया था। इस हमले के बाद इजराइली सुरक्षा एजेंसी मोसाद और सेना पर सवाल उठे थे। हालांकि, हमास हमले का जवाब देते हुए इजराइल ने गाजा पट्टी पर भारी बमबारी की थी।

अब तक जारी है युद्ध

हमले के बाद इजराइल और हमास के बीच युद्ध अब तक जारी है। इस बीच, इज़रायली सेना ने सेंट्रल गाजा के नुसेरात कैंप पर गुरूवार रात एक घर पर बमबारी की, जिसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। नुसेरात के उत्तर में अल-मुफ़्ती क्षेत्र में हुए इस हमले में एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि अल-अवदा अस्पताल में भर्ती एक लड़की की हालत गंभीर है। गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद से मरने वालों की संख्या 38,345 हो गई है, जबकि 88 हज़ार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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