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हमास से जंग के बीच इजराइल ने भारत से मांगे 1 लाख मजदूर, आखिर क्या है नेतन्याहू की मजबूरी?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 7, 2023, 10:49 AM IST

Israel Hamas War: गाजा में चल रहे युद्ध के बीच बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी अपना वर्क परमिट खो चुके हैं। ऐसे में विभिन्न कंपनियों को कम से कम 1 लाख भारतीय श्रमिकों की आवश्यकता है। इसको लेकर इजराइली बिल्डर्स एसोसिएशन की ओर से नेतन्याहू सरकार को पत्र भी लिखा गया गया है।

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इजराइल-हमास संघर्ष

Photo : AP

Israel Hamas War: इजराइल और हमास के बीच जारी जंग को एक महीना हो गया है। बीते 7 अक्टूबर को हमास ने इजराइल पर रॉकेट से हमला किया था, जिसके बाद से अब तक सिर्फ गाजा में ही 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा लाखों लोग गाजा से विस्थापित भी हो चुके हैं। बावजूद इसके गाजा पट्टी पर इजराइल के ताबड़तोड़ हमले जारी हैं। इस बीच खबर है कि इजराइल ने भारत से 1 लाख मजदूरों की मांग की है।

दरअसल, इजराइली बिल्डर्स एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 1 लाख भारतीय श्रमिकों की भर्ती किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि फलिस्तीनियों की जगह लेने के लिए कंपनियों को भारतीय श्रमिकों की जरूरत है।

परमिट खो चुके हैं फिलिस्तीनी मजदूर

द स्टेट्समैन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा पट्टी में मजदूरों की कमी को लेकर इजराइली बिल्डर्स एसोसिएशन ने नेत्याहू सरकार को एक लेटर लिखा है। इसमें आग्रह किया गया है कि कंपनियों को भारतीय श्रमिकों को काम पर रखने की अनुमति दी जाए। दरअसल, गाजा में चल रहे युद्ध के बीच बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी अपना वर्क परमिट खो चुके हैं। ऐसे में उन्हें 1 लाख भारतीय श्रमिकों को काम पर रखने की अनुमति दी जाए।

अस्थाई सीजफायर पर विचार कर सकते हैं नेतन्याहू

इस बीच बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिकि, पहली बार इजराइली प्रधानमंत्री सीजफायर को लेकर राजी हुए हैं। हालांकि, यह सीजफायर कुछ समय के लिए होगा। नेतन्याहू ने कहा है कि गाजा में मानवीय सहायता के प्रवेश और बंधकों को बाहर निकालने की सुविधा के लिए वह अस्थाई और छोटे युद्धविराम पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने गाजा में सामान्य सीजफायर के आह्वान को एक बार फिर से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि हमास को पूरी तरह से खत्म किए बिना इजराइल के हमले नहीं रुकेंगे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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