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पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी की तबीयत को क्या हो गया? इलाज के लिए दुबई जाने को लेकर क्यों मचा कोहराम; जानें सारा माजरा

Pakistan President Asif Ali Zardari Health: क्या पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी अपने मुल्क में नहीं हैं? ये सवाल इसलिए क्योंकि उनके दुबई जाने को लेकर अटकलें इतनी तेज हो गईं कि जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को इस विवाद में सफाई देनी पड़ गई। आपको सारा माजरा बताते हैं।

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क्या पाकिस्तान में नहीं हैं राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी? पीपीपी को देनी पड़ी सफाई।

Pakistan News: सिंध के वरिष्ठ मंत्री शरजील इनाम मेमन ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। उन्होंने जरदारी को इलाज के लिए दुबई ले जाने की खबरों का खंडन किया।

क्या इलाज के लिए दुबई गए पाकिस्तान के राष्ट्रपति?

'डॉन डॉट कॉम' की रिपोर्ट के मुताबिक यह स्पष्टीकरण तब आया जब मंगलवार को मीडिया ने सूत्रों के हवाले से खबर दी कि राष्ट्रपति जरदारी को नवाबशाह से लाए जाने के बाद कराची के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। जरदारी ने नवाबशाह में ईद-उल-फितर की नमाज अदा की थी।

शहबाज शरीफ ने जल्द स्वस्थ होने की कामना की

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी राष्ट्रपति से संपर्क कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मेमन ने बुधवार तड़के एक्स पर सूत्रों पर आधारित मीडिया रिपोर्टों का एक कोलाज साझा करते हुए लिखा, "राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को इलाज के लिए दुबई ले जाए जाने की खबरें गलत हैं।"

पार्टी ने बताया- राष्ट्रपति के स्वास्थ्य में हो रहा है सुधार

जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख नेता ने कहा कि राष्ट्रपति के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है और इंशाअल्लाह, वह जल्द ही ठीक हो जाएंगे। पीपीपी सीनेटर सेहर कामरान ने भी एक्स पर एक पोस्ट में राष्ट्रपति के लिए 'अच्छे स्वास्थ्य और शीघ्र स्वस्थ होने' की कामना की। उन्होंने लिखा, "अल्लाह उन्हें लंबी, खुशहाल और संतुष्ट जिंदगी प्रदान करे। राष्ट्रपति जरदारी राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं, उनकी दृढ़ता हम सभी को प्रेरित करती है।"

पार्टी के एक करीबी सूत्र ने 'डॉन डॉट कॉम' को बताया कि वह 'कुछ परीक्षण करवा रहे हैं और जल्द ही उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी।' सिंध के गवर्नर कामरान टेसोरी के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि उन्होंने राष्ट्रपति के डॉक्टर, असीम हुसैन को फोन किया और जरदारी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली।

हाल के वर्षों में कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हुई

69 वर्षीय राष्ट्रपति जरदारी को हाल के वर्षों में कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हुई हैं। अक्टूबर 2024 में विमान से उतरते समय राष्ट्रपति के पैर में फ्रैक्चर हो गया था। गिरने के बाद उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। जांच के बाद डॉक्टर ने उनके पैर में प्लास्टर चढ़ा दिया। मार्च 2023 में संयुक्त अरब अमीरात में उनकी आंख की सर्जरी हुई।

उनके बेटे और पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी के अनुसार, जुलाई 2022 में उनका कोविड-19 परीक्षण पॉजिटिव आया था, लेकिन उन्हें 'हल्के लक्षण' ही महसूस हुए थे। उस वर्ष के अंत में, उन्हें छाती के संक्रमण के इलाज के लिए एक सप्ताह के लिए कराची के डॉ. जियाउद्दीन अस्पताल में भर्ती कराया गया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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