Israel Lebanon Conflict: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच भले ही फौरी सीजफायर का ऐलान हो गया है, लेकिन लेबनान में स्थिति अभी भी भयावह बनी हुई है। सीजफायर के कुछ घंटे बाद ही इजरायल ने लेबनान पर भीषण कहर बरपाया। महज 10 मिनट में 100 ठिकानों को निशाना बनाया जिसमें लगभग 203 लोगों की मौत हो गई, जबकि हजार से ज्यादा घायल बताए जा रहे हैं। यह आंकड़े खुद लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किए हैं।
इस बीच, ईरान ने एक बात तो साफ कर दी कि अगर इजरायल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले नहीं रोके तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कालिबाफ ने गुरुवार को चेतावनी दी कि अगर लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायल के हमले जारी रहे तो इसके स्पष्ट नतीजे सामने आएंगे और कड़ा जवाब दिया जाएगा।
कालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर चेतावनी भरा एक संदेश जारी किया। उन्होंने अन्य ईरानी अधिकारियों की तरह इस बात पर जोर दिया कि दो सप्ताह का सीजफायर लेबनान में भी लागू होता है, जिसे इजरायल और अमेरिका दोनों ने नकार दिया है। उन्होंने कहा, ''सीजफायर उल्लंघन का स्पष्ट और कड़ा जवाब दिया जाएगा।''
हिजबुल्लाह नेता के सहयोगी की मौत
इजरायल ने दावा किया कि लेबनान की राजधानी बेरूत पर बुधवार को किए गए उसके भीषण हवाई हमलों में हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम का एक सहयोगी मारा गया। इजरायल ने मारे गए व्यक्ति की पहचान कासिम के सचिव एवं रिश्तेदार अली यूसुफ हरशी के रूप में की है। हिजबुल्लाह ने इस दावे पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
वार्ता में कौन होगा शामिल?
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, मोहम्मद बागेर कालिबाफ के नाम पर संभावित वार्ताकार के रूप में चर्चा हो रही है, जो इस सप्ताहांत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि, वेंस के आगमान का कोई समय निर्धारित नहीं किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके साथ स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी होंगे।
तेहरान ने संकेत दिया है कि यह बातचीत प्रस्तावित 10 सूत्री योजना पर आधारित होगी, जिसमें प्रतिबंधों को हटाने, भविष्य के हमलों के विरुद्ध गारंटी और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की व्यवस्था शामिल है। आगामी वार्ता पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसकी सफलता या विफलता का पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर दूरगामी असर पड़ सकता है।
