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होर्मुज पर और बढ़ा तनाव! फ्रांस-ब्रिटेन को ईरान की खुली चेतावनी, युद्धपोत भेजा तो खैर नहीं, मिलेगा जवाब

X पर ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम घारिबाबादी कहा, 'हम उन्हें याद दिलाते हैं कि युद्ध हो या शांति, केवल इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ही इस जलडमरूमध्य में सुरक्षा स्थापित कर सकता है और वह किसी भी देश को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देगा।'

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिर बढ़ा तनाव।

Photo : AP

Strait Of Hormuz : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद दुनिया भर तेल और गैस की किल्लत हो रही है। कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं हिलने लगी हैं। होर्मुज को खुलवाने के लिए अब यूरोप के दो बड़े देश फ्रांस और ब्रिटेन सामने आए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही के लिए ब्रिटेन और फ्रांस एक सुरक्षित गलियारा बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। यह बात ईरान को नागवार गुजरी है और उसने दोनों देशों को चेतावनी दी है। ईरान ने रविवार को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यदि कोई देश अपना युद्धपोत भेजता है तो उसकी सशस्त्र सेनाएं 'तत्काल एवं निर्णायक कार्रवाई' शुरू करेंगी।

होर्मुज में किसी देश का दखल बर्दाश्त नहीं करेंगे-ईरान

X पर ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम घारिबाबादी कहा, 'हम उन्हें याद दिलाते हैं कि युद्ध हो या शांति, केवल इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ही इस जलडमरूमध्य में सुरक्षा स्थापित कर सकता है और वह किसी भी देश को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देगा।' ब्रिटेन और फ्रांस होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को घोषणा की कि वह मध्य पूर्व में एक डिस्ट्रॉयर युद्धपोत भेजेगा। मंत्रालय का कहना है कि इससे व्यावसायिक जहाजों का भरोसा मजबूत होगा और संघर्ष समाप्त होने के बाद माइंस हटाने के प्रयासों को समर्थन मिलेगा।

होर्मुज में होगी HMS ड्रैगन की तैनाती!

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने AFP से कहा, 'HMS ड्रैगन की अग्रिम तैनाती एहतियाती योजना का हिस्सा है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर ब्रिटेन और फ्रांस के संयुक्त नेतृत्व वाले बहुराष्ट्रीय गठबंधन के तहत यूके जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए तैयार रहे।' हालांकि, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को स्पष्ट किया कि फ्रांस ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक तैनाती की कभी कल्पना नहीं की थी, बल्कि वह ऐसा सुरक्षा मिशन चाहता है जो 'ईरान के साथ समन्वित' हो।

मिशन में भाग लेने पर 44 देश सहमत

अप्रैल में लंदन में आयोजित दो दिवसीय बैठक में 44 से अधिक देशों के सैन्य योजनाकारों ने ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व वाले बहुराष्ट्रीय मिशन की व्यावहारिकताओं पर चर्चा की, जिसका उद्देश्य इस अहम समुद्री मार्ग में नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। समझा जाता है कि करीब 40 देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन को सुचारु बनाने के मिशन में भाग लेने पर सहमति जताई है। इस बीच, ईरानी सेना ने रविवार को चेतावनी दी कि जो देश इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करेंगे, उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

इसी महीने अमेरिकी सरकार ने ईरानी हितों पर नए प्रतिबंध लगाए थे और जहाजों को चेतावनी दी थी कि वे जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए तेहरान के अधिकारियों को भुगतान न करें।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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