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ईरान युद्ध को पूरा हुआ एक महीना; किसको मिली बढ़त, कितने लोगों की गई जान, जानें- हर दिन US ने संघर्ष पर कितने रुपये फूंके?

Iran WAR One Month completed: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को एक महीना पूरा हो चुका है। अब तक लड़ाई खत्म होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ संघर्ष को समाप्त करने की बात कर रहे हैं।

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ईरान युद्ध को पूरा हुआ एक महीना

A month of Iran war: अमेरिका और इजरायल को ईरान के खिलाफ जंग छेड़े हुए एक महीना हो गया है, जिससे पश्चिम एशिया में अफरा-तफरी और भारी हिंसा फैल गई है। भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जंग खत्म करने के लिए बातचीत की संभावना की बात कर रहे हैं, लेकिन लड़ाई अभी भी जारी है।

इजरायल ने ईरान के एक बड़े स्टील प्लांट पर हमला किया है, जबकि ईरानी सेना ने ओमान के तट के पास मौजूद अमेरिकी सेना के एक सपोर्ट जहाज को निशाना बनाया है। यमन के हूती विद्रोहियों के इस संघर्ष में शामिल होने से जंग और भी ज्यादा बढ़ गई है। इजरायल की सेना ने बताया कि शनिवार (28 मार्च) की सुबह उसने यमन से इजराइल की ओर दागी गई एक मिसाइल को बीच में ही रोक दिया।

जैसे-जैसे लड़ाई जारी है, हम आंकड़ों के जरिए इस युद्ध पर एक नजर डालते हैं।

जान-माल का नुकसान

एक दर्जन से ज्यादा देशों से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध में 4,500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के अलावा, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और UAE जैसे कई खाड़ी देश भी हमलों का सामना कर रहे हैं।

मानवाधिकार समूह HRANA के अनुसार, अमेरिका-इजरायल युद्ध में ईरान में करीब 3,300 लोगों की मौत हुई है। इनमें 1,464 आम नागरिक शामिल हैं, जिनमें कम से कम 217 बच्चे भी हैं।

28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन, दक्षिणी ईरान के एक प्राइमरी स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में लगभग 175 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर स्कूली छात्राएं थीं। शुरुआती जांच से पता चला कि इस जानलेवा हमले के पीछे अमेरिका का हाथ था।

ईरान के हमलों में इजरायल में कम से कम 19 लोग मारे गए हैं और 5,492 से ज्यादा अन्य लोग घायल हुए हैं।

अमेरिकी सेना ने पुष्टि की है कि ईरानी हमलों के कारण पश्चिम एशिया में 13 लोग हताहत हुए हैं।

युद्ध में 4,500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी

युद्ध में 4,500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद, इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच भी लड़ाई शुरू हो गई है।

लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, 2 मार्च से अब तक लेबनान में इजरायल के हमलों में लगभग 1,100 लोग मारे गए हैं, जिनमें कम से कम 121 बच्चे शामिल हैं।

ब्रिटिश रेड क्रॉस के मध्य-पूर्व कंट्री क्लस्टर मैनेजर, गैब्रियल कार्लसन ने 'द इंडिपेंडेंट' को बताया कि इस संघर्ष के कारण अब तक दस लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के अनुसार, लेबनान में सिर्फ तीन हफ्तों के अंदर 3,70,000 से ज्यादा बच्चों को अपना घर छोड़ना पड़ा; वहीं, इजरायली सेना ने देश के लगभग 15 प्रतिशत हिस्से—जिसमें पूरा दक्षिणी क्षेत्र भी शामिल है, इसमें रहने वाले लोगों को इलाका खाली करने का आदेश दिया है।

निशाने साधे गए, हथियार खत्म हो गए

ईरान युद्ध के एक महीने में हजारों निशानों पर हमले किए गए हैं। US सेंट्रल कमांड के अनुसार, US सेना ने ईरान में 1,000 से ज्यादा निशानों पर हमले किए, जबकि इजरायली वायु सेना ने 750 और निशानों पर हमले किए।

सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ के विश्लेषण के अनुसार, युद्ध के दो हफ्तों के बाद, US और इजरायल ने कुल 15,000 निशानों पर हमले करने का दावा किया।

युद्ध के 10वें दिन से हमलों की रफ्तार घटकर हर दिन 300–500 निशानों पर आ गई है।

द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, US ने सिर्फ एक महीने में 850 से ज्यादा टोमाहॉक मिसाइलें दागी हैं, जो कि वह हर साल जितनी बना सकता है, उससे कहीं ज्यादा हैं। एक टोमाहॉक मिसाइल बनाने में दो साल तक का समय लगता है, जिसकी कीमत $3.6 मिलियन (Rs 34.2 करोड़) प्रति मिसाइल है।

युद्ध के पहले 16 दिनों के दौरान, US ने 912 AGM-158 JASSM और JASSM-ER स्टेल्थ क्रूज मिसाइलें भी दागीं। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) की वेबसाइट पर किए गए विश्लेषण के अनुसार, उसने 1,080 GBU-31, GBU-32 और GBU-38 JDAM गाइडेड बम गिराए।

युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक एक दर्जन से ज्यादा MQ-9 Reaper ड्रोन नष्ट हो चुके हैं, जिनमें से हर एक की कीमत कम से कम $16 मिलियन है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कम से कम आठ ड्रोन ईरानी मिसाइलों द्वारा मार गिराए गए, जबकि एक ड्रोन को फारसी खाड़ी के किसी देश ने गलती से मार गिराया।

इंग्लैंड की पोर्ट्समाउथ यूनिवर्सिटी में एयर पावर स्टडीज के लेक्चरर मैथ्यू पॉवेल ने अनादोलु एजेंसी को बताया कि अमेरिका के पास 'ATACMS ग्राउंड अटैक मिसाइलें और THAAD इंटरसेप्टर खत्म होने में अब लगभग एक महीना ही बचा है।'

इजरायल भी अपने हथियारों का जबरदस्त इस्तेमाल कर रहा है। इजरायल की Blue Sparrow एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइलों के 5 अप्रैल तक खत्म होने की आशंका है, जबकि उसके David’s Sling Stunner इंटरसेप्टर शायद 6 अप्रैल तक ही चल पाएंगे।

इजरायल की Rampage सुपरसोनिक मिसाइलों का जखीरा 9 अप्रैल तक समाप्त हो जाएगा। इजरायल ने अपने 150 Arrow 2 और Arrow 3 इंटरसेप्टर में से 122 का इस्तेमाल कर लिया है, जो कि 81 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।

जानकारों का कहना है कि ईरान ने अभी तक अपना पूरा हथियार जखीरा सामने नहीं रखा है।

अनुमानों के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती दिनों में ईरान ने 500 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और 2,000 से ज्यादा ड्रोन दागे थे।

2026 की शुरुआत तक, ऐसी रिपोर्टें थीं कि ईरान के पास 80,000 तक Shahed-136 'कामिकेज' ड्रोन का जखीरा है और वह हर दिन ड्रोन बना सकता है। तेहरान ने युद्ध में लक्ष्यों पर हमला करने के लिए इनमें से कई ड्रोनों का इस्तेमाल किया है।

अनादोलु एजेंसी ने एक सीनियर रिसर्चर और पॉलिसी एडवाइजर इब्राहिम जलाल द्वारा जुटाए गए डेटा का हवाला देते हुए बताया कि ईरान ने इजरायल, खाड़ी देशों, इराक, जॉर्डन और सीरिया में 5,693 से ज्यादा हमले किए थे।

इजरायल पर 870 से ज्यादा हमले हुए हैं, जिनमें से ज्यादा ड्रोन से और कुछ मिसाइलों से किए गए थे।

जलाल के मुताबिक, ईरान के पास न तो मिसाइलों और ड्रोनों की कमी हुई है और न ही उसने अपनी सभी क्षमताओं को सामने रखा है।

ईरान के पास मिसाइलों और ड्रोनों की कमी नहीं

ईरान के पास मिसाइलों और ड्रोनों की कमी नहीं

जलाल ने कहा, 'उसने अपने जखीरे का 30-40 फीसदी से ज्यादा इस्तेमाल भी नहीं किया है। उसकी सालाना उत्पादन क्षमता 1500 मिसाइलों और 2000 ड्रोनों से ज्यादा है।' उन्होंने आगे कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक कई सालों से बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है।

ईरान युद्ध की लागत

अनुमान है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने युद्ध पर हर दिन $1 बिलियन (9,486 करोड़ रुपये) तक खर्च कर रहा है।

जानकारों का कहना है कि जहां ईरान ऐसे ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है जिनकी कीमत करीब $20,000 (करीब 19 लाख रुपये) प्रति पीस है, वहीं अमेरिका अक्सर ऐसे मिसाइलें तैनात कर रहा है जिनकी कीमत $1.3 मिलियन (12 करोड़ रुपये) से $4 मिलियन (37.9 करोड़ रुपये) के बीच है।

पेंटागन के अधिकारियों ने सांसदों को बताया कि संघर्ष के शुरुआती छह दिनों में ही अमेरिका को $11.3 बिलियन (11 हजार करोड़ रुपये) का खर्च आया।

व्हाइट हाउस ईरान युद्ध के लिए $200 बिलियन (19 लाख करोड़ रुपये) और मांग रहा है; राष्ट्रपति ट्रंप इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यह रकम युद्ध और यूक्रेन जैसे दूसरे देशों को दी गई पिछली मदद के कारण खत्म हो चुके गोला-बारूद और दूसरी जरूरी चीजों की भरपाई के लिए जरूरी है।

पेंटागन की पूर्व बजट अधिकारी एलेन मैकस्ककर के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती तीन हफ्तों में लड़ाई से हुए नुकसान की भरपाई और खोई हुई चीजों को बदलने के लिए अमेरिका को शायद $1.4 बिलियन (13,281 करोड़ रुपये) से $2.9 बिलियन (27,510 करोड़ रुपये) के बीच की रकम की जरूरत पड़ेगी, जैसा कि 'इंडिपेंडेंट' ने रिपोर्ट किया है।

वैश्विक तेल और अर्थव्यवस्था पर असर

अमेरिका और इजरायल द्वारा युद्ध शुरू किए जाने के बाद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया; यह एक अहम समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल और समुद्री रास्ते से जाने वाली लिक्विफाइड गैस गुजरती है। ऊर्जा की सप्लाई में रुकावट आने के कारण वैश्विक तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।

27 फरवरी को $72 (6,830 रुपये) प्रति बैरल बिकने वाले तेल की कीमत अब $90 (8,538 रुपये) से $100 (9,486.42 रुपये) के बीच पहुंच गई है। 9 मार्च को कीमतें अपने सबसे ऊंचे स्तर $120 (11,384 रुपये) प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं।

सिटी के विश्लेषकों के ज्यादा गंभीर परिदृश्यों के अनुमानों के अनुसार, इस साल वैश्विक विकास दर 2 प्रतिशत से नीचे आ सकती है, क्योंकि मुख्य मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत से ऊपर निकल गई है।

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि तेल की कीमतों में आए झटके के कारण, इस साल के अंत तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था को हर महीने 10,000 नौकरियों का नुकसान होगा, जिसमें रेस्तरां, होटल और खुदरा स्टोर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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