पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नई रणनीति तैयार करने का दावा किया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा है कि तेहरान ने जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए एक “पेशेवर तंत्र” तैयार किया है, जिसे जल्द लागू किया जाएगा।
अजीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह सिस्टम ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। उनके अनुसार, इस व्यवस्था का लाभ केवल उन व्यावसायिक जहाजों और पक्षों को मिलेगा जो ईरान के साथ सहयोग करेंगे।
क्या है ईरान की नई योजना?
ईरान के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक तय समुद्री मार्ग निर्धारित किया जाएगा। जहाजों की आवाजाही एक विशेष ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत नियंत्रित होगी और कुछ विशिष्ट सेवाओं के बदले शुल्क भी लिया जाएगा।फ्रीडम प्रोजेक्ट वालों को नहीं मिलेगा लाभ
अजीजी ने संकेत दिया कि यह व्यवस्था सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध नहीं होगी। उन्होंने कहा कि तथाकथित “फ्रीडम प्रोजेक्ट” से जुड़े संचालकों को इस सिस्टम का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि ईरान ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है कि “फ्रीडम प्रोजेक्ट” से उसका आशय किन देशों या संगठनों से है।
वैश्विक व्यापार के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और गैस के टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य या प्रशासनिक तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान जहाजों पर अतिरिक्त नियंत्रण या शुल्क लागू करता है, तो इससे समुद्री बीमा लागत, तेल परिवहन खर्च और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।
यूएई और कुवैत को भी कड़ी चेतावनी
इसी बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के सलाहकार मोहम्मद मोखबर के बयान ने भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है। मोखबर ने कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने इलाकों को ईरान के विरोधियों के इस्तेमाल के लिए खुला छोड़ दिया है।
उन्होंने कहा कि ईरान ने लंबे समय तक इन देशों को “दोस्त और भाई” माना, लेकिन अब उन्होंने अपनी जमीन दुश्मनों को इस्तेमाल करने दी है। मोखबर ने यह भी दावा किया कि हालिया संघर्ष में ईरान ने जिन ठिकानों को निशाना बनाया, वे अमेरिकी ठिकाने थे और तेहरान ने अब तक “पूरी ताकत” का इस्तेमाल नहीं किया है।
बढ़ सकती है क्षेत्रीय चिंता
ईरान के इन बयानों ने एक बार फिर पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ जारी तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी भी नई नीति का असर वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
