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Fact Check: ईरान ने जब इजरायल पर किया मिसाइल हमला, तो बंकर में भागने लगे बेंजामिन नेतन्याहू? देखें VIDEO; जानें सच

Benjamin Netanyahu Video: क्या ईरान ने जब इजरायल पर मिसाइल से हमले किए तो इस दौरान बेंजामिन नेतन्याहू बंकर में भाग गए थे? ऐसा दावा ईरान के समर्थक सोशल मीडिया पर कर रहे हैं। हालांकि ये कितना सच्चा है, इसका खुलासा हो चुका है। आपको उस तथ्य से रूबरू करवाते हैं जो सच फैक्ट चेक में सामने आया।

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बेंजामिन नेतन्याहू।

Israel vs Iran: ईरान ने इजरायल पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी। जैसे ही ईरान की मिसाइलें, जिनमें से कुछ हाइपरसोनिक थीं, इजरायली हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गईं, पूरे देश में सायरन बजने लगे, जिससे हजारों लोग सुरक्षा की तलाश में निकल पड़े। किसी के हताहत होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है और इजराइल ने निवासियों को बंकरों में जाने का आदेश दिया। लेकिन एक सवाल उठ रहा है कि क्या जब ईरान ने हमले किए तो नेतन्याहू भागने लगे थे?

क्या बंकर में छिपने के लिए भाग रहे थे नेतन्याहू?

मंगलवार रात को इजरायल पर ईरान के बड़े रॉकेट हमले के बाद, सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले वीडियो क्लिप में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कथित तौर पर एक बंकर के अंदर छिपने के लिए भागते हुए दिखाई दिए। जैसे ही ईरान की मिसाइलें, जिनमें से कुछ हाइपरसोनिक थीं, इजरायली हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गईं, पूरे देश में सायरन बजने लगे, जिससे हजारों लोग सुरक्षा की तलाश में निकल पड़े।

सोशल मीडिया पर क्या बोल रहे हैं ईरान के समर्थक?

ईरान समर्थक सोशल मीडिया हैंडल ने एक वीडियो क्लिप साझा की, जिसमें कथित तौर पर बेंजामिन नेतन्याहू को एक कथित बंकर के गलियारों में भागते हुए दिखाया गया। एक पोस्ट में दावा किया गया कि "ईरान की प्रतिक्रिया के सामने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बंकर में भागते हुए लम्हे।" एक अन्य ने दावा किया कि "कृपया कोई बेंजामिन नेतन्याहू को छिपने की जगह दे। बेचारा भाग भी नहीं रहा है। आखिरकार, उसने बंकर में छिपकर अपनी जान बचाई। वह भाग गया और छिप गया, अपने देशवासियों को खुद के हाल पर छोड़ दिया।"

फैक्ट चेक में सामने आई असलियत

भले ही ईरान समर्थक ये दावा कर रहे हों कि ईरान के हमले के बाद नेतन्याहू भागने लगे, लेकिन असल बात ये है कि ये वीडियो करीब तीन साल पुराना है, इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि फेसबुक पर इसी वीडियो को 2021 में साझा किया गया था, इस पोस्ट से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। मूल वीडियो में कथित तौर पर बेंजामिन नेतन्याहू को इजरायली संसद केसेट के गलियारों से भागते हुए दिखाया गया है।

बेंजामिन ने "इसकी कीमत चुकाने" की कसम खाई

नेतन्याहू ने ईरान के मिसाइल हमले को "एक बड़ी गलती" करार दिया और तेहरान को "इसकी कीमत चुकाने" की कसम खाई। उन्होंने कहा, "ईरान ने आज रात एक बड़ी गलती की है और उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। जो कोई भी हम पर हमला करेगा, हम उस पर हमला करेंगे।" यह मिसाइल हमला इस साल ईरान द्वारा इजरायल पर दूसरा सीधा हमला है, इससे पहले अप्रैल में भी इसी तरह का हमला किया गया था, जिसे इजरायल और सहयोगी देशों की सुरक्षा ने तुरंत दबा दिया था।

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को किए गए हमले, इजरायली सैन्य अभियानों में वरिष्ठ हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह और हमास नेता इस्माइल हनीयेह की हाल ही में हुई हत्या का बदला लेने के लिए किए गए थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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