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Iran Israel US War: 'शांति के लिए तैयार, लेकिन संप्रभुता पर समझौता नहीं...': ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन का बड़ा बयान

Iran Israel US War Update: ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन का बड़ा बयान सामने आया है।

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ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन का बड़ा बयान (फोटो:canva)

ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का आज सातवां दिन हैं। इन हमलों में अब तक 1200 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं वहीं हजारों की संख्या में लोग घायल हुए हैं। इजराइल और ईरान के कई शहर बमबारी में तबाह हो चुके हैं। सात दिनों से लगातार हवाई हमले और मिसाइल हमले हो रहे हैं। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन का बड़ा बयान सामने आया है।

ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन ने ट्वीट कर कहा है कि 'कुछ देशों ने बीच-बचाव की कोशिशें शुरू कर दी हैं। साफ़-साफ़ कह दें: हम इस इलाके में हमेशा शांति बनाए रखने के लिए कमिटेड हैं, फिर भी हमें अपने देश की इज्ज़त और आज़ादी की रक्षा करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है। बीच-बचाव उन लोगों पर होना चाहिए जिन्होंने ईरानी लोगों को कम आंका और इस झगड़े को भड़काया।'

हमलों को रोकने के लिए लाए गए युद्ध शक्तियों से संबंधित प्रस्ताव खारिज

वहीं इससे पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान पर किए जा रहे हमलों को रोकने के लिए लाए गए युद्ध शक्तियों से संबंधित प्रस्ताव को बृहस्पतिवार को बहुत कम अंतर से खारिज कर दिया।मतों का यह अंतर संसद के भीतर बढ़ती असहजता का शुरुआती संकेत माना जा रहा है, क्योंकि तेजी से फैल रहा इस युद्ध का दायरा अमेरिका की घरेलू और वैश्विक प्राथमिकताओं को बदल रहा है।

पिछले कुछ दिनों में यह दूसरा प्रस्ताव है जो असफल हुआ

पिछले कुछ दिनों में यह दूसरा प्रस्ताव है जो असफल हुआ है। इससे पहले सीनेट ने ऐसे ही एक प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। सांसदों के सामने जान-माल के नुकसान, भारी खर्च और अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों की परीक्षा समेत युद्ध के कारण पैदा हुई स्थिति से चिंतित अमेरिकी जनता का प्रतिनिधित्व करने की चुनौती है।प्रतिनिधि सभा में यह प्रस्ताव 212 के मुकाबले 219 मतों से खारिज हो गया। इस नतीजे ने अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान और ट्रंप द्वारा संसद को दरकिनार करने के फैसले के समर्थन और विरोध की स्थिति को स्पष्ट कर दिया। अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध घोषित करने का अधिकार केवल संसद को है।

देश की सत्ता की बागडोर को लेकर चर्चाएं तेज

वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की रमजान के महीने में मौत होने के बाद देश की सत्ता की बागडोर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में सबसे प्रमुख नाम उनके बेटे मोजतबा खामेनेई का है, जिन्हें लंबे समय से ईरान की सत्ता व्यवस्था के भीतर प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है।

मोजतबा खामेनेई एक धर्मगुरु

मोजतबा खामेनेई एक धर्मगुरु हैं, जिन्होंने अपने अधिकतर राजनीतिक जीवन में कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन वह सर्वोच्च नेता के कार्यालय के भीतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्हें अक्सर सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली 'पावर ब्रोकर' और 'गेटकीपर' के रूप में देखा जाता रहा है।बताया जाता है कि 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में संक्षिप्त रूप से हिस्सा लिया था। हालांकि उन्हें व्यापक सार्वजनिक पहचान 1990 के दशक के आखिर में मिली, जब उनके पिता अली खामेनेई की सर्वोच्च नेता के रूप में स्थिति मजबूत हो चुकी थी। समय के साथ उनकी पहचान दो प्रमुख पहलुओं से जुड़ी रही है। पहला, ईरान की सुरक्षा व्यवस्था, विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और उससे जुड़े कट्टरपंथी नेटवर्क के साथ उनके करीबी संबंध। दूसरा, सुधारवादी राजनीति और पश्चिमी देशों के साथ करीबी संबंधों के प्रति उनका कड़ा विरोध।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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