ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi In China) एक उच्च स्तरीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडल के साथ चीन पहुंच चुके हैं। ईरानी समाचार एजेंसियों (तस्नीम और फार्स) के अनुसार, अराघची यहां चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर ध्यान
अपनी यात्रा के दौरान, अराघची चीन के उप-प्रधानमंत्री डिंग शुएक्सियांग से भी मुलाकात कर चुके हैं। इस वार्ता का उद्देश्य ईरान और चीन के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना है। चीन, ईरान का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार और कूटनीतिक सहयोगी रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत में 'बड़ी प्रगति' का दावा किया था, लेकिन साथ ही ईरान द्वारा खाड़ी देशों (UAE) पर हमलों की खबरें भी सामने आई हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य एजेंडा क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा करना है। विशेष रूप से ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच गहन मंथन होने की उम्मीद है।
अपनी यात्रा के दौरान अराघची चीन के अपने समकक्ष वांग यी के साथ दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने और मौजूदा वैश्विक स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि अराघची की यह यात्रा वांग यी के निमंत्रण पर हो रही है और दोनों नेताओं के बीच बातचीत होगी।
रूस और पाकिस्तान का दौरा कर चुके हैं अराघची
अराघची ने टेलीग्राम पर एक बयान में कहा कि यह यात्रा कई देशों के साथ जारी कूटनीतिक बातचीत का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस दौरान वह चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा किया है।
'थोड़े समय के लिए रुकेगा 'प्रोजेक्ट फ्रीडम': ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के मकसद से शुरू किए गए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को थोड़े समय के लिए बंद किया जाएगा। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाहर ईरानी जहाजों का ब्लॉकेड जारी रहेगा। नेवल ब्लॉकेड के तहत ईरान के बंदरगाहों से निकलने वाले जहाजों को अमेरिका आगे बढ़ने नहीं दे रहा है। इससे ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
