Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को कहा कि कच्चे तेल की कीमतें कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) दुनिया भर के नेशनल पेट्रोलियम रिजर्व्स से 400 मिलियन बैरल ऑयल जारी करेगी। इसके लिए एजेंसी तैयार हो गई है। ईरान युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा होने से निश्चित रूप से तेल की कीमत कम होगी। इससे अमेरिका और दुनिया दोनों को तेल की आपूर्ति होने में राहत मिलेगी।
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक
अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। सप्ताह की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई थी क्योंकि वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद था। बाद में बुधवार को कीमतें घटकर करीब 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं।
जरूरत का करीब 88 प्रतिशत तेल आयात करता है भारत
भारत की जहां तक बात है तो भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। देश की कुल खपत लगभग 58 लाख बैरल प्रतिदिन है जिसमें से करीब 25 से 27 लाख बैरल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। एसएंडपी ने कहा कि इस मार्ग पर उच्च निर्भरता के बावजूद भारत के पास सीमित भंडार है। देश के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लगभग 10 दिन की खपत के लिए पर्याप्त हैं जबकि वाणिज्यिक भंडार करीब 65 दिन के लिए पर्याप्त हो सकता है। एलपीजी और एलएनजी के भंडार इससे भी कम हैं। रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती कीमतें एवं सरकारी निर्देश तेल कंपनियों के मुनाफे को कम कर सकते हैं। हालांकि, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) पर जोखिम कम होगा क्योंकि ऊंची कीमतों से उनकी बिक्री बढ़ती है और उनका पश्चिम एशिया से परिचालन जोखिम सीमित है।
32 देश अपने आपातकालीन भंडार से देंगे तेल
तेल की वैश्विक मांग को संभालने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के 32 सदस्य देशों ने अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल बाजार में उतारने का फैसला किया है. इसे अब तक की सबसे बड़ी सामूहिक कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि यह बड़ा दिखने वाला कदम भी वैश्विक मांग के मुकाबले बेहद छोटा साबित हो सकता है। दुनिया भर में रोज जितना तेल इस्तेमाल होता है, उसके हिसाब से यह कम है।
