गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अधिकारियों को जनसमस्याओं के समाधान में तत्परता और संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है और इसके निस्तारण में किसी भी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए।
गोरखपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री ने मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आए करीब 150 लोगों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री खुद लोगों के बीच पहुंचे और एक-एक कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने फरियादियों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का समाधान कराया जाएगा और उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।
योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और संतोषजनक तरीके से किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसमस्याओं के समाधान में शिथिलता या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी।
आपदा के बीच भी जारी रही भागवत कथा
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कथा के दौरान देश के कई राज्यों में भीषण आपदा आई, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ और तमाम व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हुईं। इसके बावजूद भगवान गोरखनाथ की पावन भूमि पर कथा श्रद्धा भाव के साथ अनवरत चलती रही और श्रद्धालुओं का आगमन भी जारी रहा।
उन्होंने कहा कि आपदा भी श्रद्धालुओं की आस्था के मार्ग में बाधक नहीं बन पाई और यही भारत की पहचान है। ‘हम भारतीयों की सबसे बड़ी कमी रही कि हमने खुद को विस्मृत कर दिया। योगी ने कहा कि भारत के पास प्राचीन काल से ही दुनिया की समृद्ध और सुसंस्कृत परंपरा रही है, लेकिन भारतीयों की सबसे बड़ी कमी यह रही कि उन्होंने खुद को विस्मृत कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब लोग पूछते हैं कि उत्तर प्रदेश इतनी तेजी से कैसे आगे बढ़ रहा है, तो इसके लिए राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिसने अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति और प्रयागराज की समरसता को नहीं समझा, वह उत्तर प्रदेश और भारत को भी पूरी तरह नहीं समझ सकता।
