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फिलिस्तीन के विरोध में ट्वीट पड़ा भारी, बहरीन में भारतीय मूल के डॉक्टर को नौकरी से निकाला

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 20, 2023, 05:29 PM IST

Israel Hamas War: डॉ. सुनील रॉव के पोस्ट के बाद रॉयल बहरीन अस्पताल की ओर से बयान जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि यह हमारे ध्यान में आया है कि डॉ. सुनील राव, जो आंतरिक चिकित्सा में विशेषज्ञ के रूप में काम कर रहे हैं, ने सोशल मीडिया पर ऐसे ट्वीट पोस्ट किए हैं जो हमारे समाज के लिए अपमानजनक हैं।

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भारतीय मूल के डॉ. सुनील राव

Photo : Twitter

Israel Hamas War: अभी कुछ दिन पहले पूर्व पोर्न स्टार मिया खलीफा को फिलिस्तीन के समर्थन में ट्वीट करना भारी पड़ा था। उन्हें ट्वीट के बाद नौकरी से निकाल दिया गया था। अब बहरीन के एक अस्पताल से भारतीय मूल के डॉक्टर सुनील राव को एक ट्वीट चलते नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर फिलिस्तीन विरोधी टिप्पणियां की थीं, जिसके बाद रॉयल बहरीन अस्पताल ने उन्हें बर्खास्त कर दिया है।

दरअसल, डॉ. सुनील राव ने हमास-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध में इजराइल का समर्थन करते हुए ट्वीट किया, जिसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने बहरीनी अधिकारियों का ध्यान उस तरफ आकर्षित किया।

अस्पताल की ओर से जारी किया गया बयान

डॉ. सुनील रॉव के पोस्ट के बाद रॉयल बहरीन अस्पताल की ओर से बयान जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि यह हमारे ध्यान में आया है कि डॉ. सुनील राव, जो आंतरिक चिकित्सा में विशेषज्ञ के रूप में काम कर रहे हैं, ने सोशल मीडिया पर ऐसे ट्वीट पोस्ट किए हैं जो हमारे समाज के लिए अपमानजनक हैं। हम पुष्टि करना चाहेंगे कि उनके ट्वीट और विचारधारा व्यक्तिगत हैं और अस्पताल की राय और मूल्यों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। यह हमारी आचार संहिता का उल्लंघन है, और हमने आवश्यक कानूनी कार्रवाई की है और तत्काल प्रभाव से उनकी सेवा समाप्त कर दी गई है।

डॉ. राव ने मानी गलती

अस्पताल की ओर से जारी बयान के बाद डॉ. राव ने अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने एक्स पर ही ट्वीट के जवाब में माफी मांगी। उन्होंने लिखा, मैं उस बयान के लिए माफी मांगना चाहूंगा जो मैंने इस मंच पर पोस्ट किया था। यह वर्तमान घटना के संदर्भ में असंवेदनशील था। एक डॉक्टर के रूप में सभी का जीवन मायने रखता है। मैं इस देश, इसके लोगों और इसके धर्म का दिल से सम्मान करता हूं। उनहेांने लिखा कि मैं पिछले 10 सालों से यहीं रह रहा हूं।

अस्पताल ने हटाई डॉ. राव की प्रोफाइल

डॉ. राव को नौकरी से निकालने के बाद रॉयल बहरीन अस्पताल ने ने अपनी वेबसाइट से उनकी प्रोफाइल को भी हटा दिया है। वे विशाखापत्तनम में आंध्र मेडिकल कॉलेज और कर्नाटक के मंगलुरु में कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्र रहे हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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