India supports Palestinian: भारत ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उस मसौदा प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जिसमें कहा गया है कि फिलिस्तीन इस वैश्विक संस्था का पूर्ण सदस्य बनने के योग्य है और उसे सदस्यता दी जानी चाहिए। भारत का यह कदम गाजा में हमास के खिलाफ जंग लड़ रहे इजराइल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। मसौदा प्रस्ताव पर भारत समेत 143 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, विरोध में नौ वोट पड़े जबकि 25 सदस्य अनुपस्थित रहे। प्रस्ताव में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुच्छेद 4 के अनुसार फिलिस्तीन संयुक्त राष्ट्र का सदस्य बनने के लिए योग्य है और इसलिए उसे सदस्यता दी जानी चाहिए।
इस ऐतिहासिक प्रस्ताव के समर्थन में भारत, फ्रांस, चीन, रूस और जापान जैसे 143 देशों ने वोट किया। वहीं, अमेरिका और इजरायल के अलावा हंगरी, चेकिया, अर्जेंटीना, माइक्रोनेशिया, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी और नाउरू ने इसका विरोध किया। यूके, कनाडा समेत कई यूरोपीय सदस्यों सहित 25 सदस्य वोटिंग के दौरान गैरहाजिर रहे।
अमेरिका ने किया था वीटो
एक पर्यवेक्षक देश बने रहने के दौरान फिलिस्तीन को महासभा के कार्यालयों में चुने जाने, अन्य पर्यवेक्षकों के साथ पीछे रहने के बजाय नियमित सदस्य देशों के बीच बैठने, सभी मामलों पर बोलने, प्रस्ताव बनाने और निकाय के समक्ष मामलों में संशोधन पेश करने का अधिकार मिलता है और विभिन्न प्रक्रियात्मक मामलों में भाग लेते हैं। लेकिन इसकी विशेष सदस्यता इसे विधानसभा में मतदान करने या संयुक्त राष्ट्र के अन्य निकायों में सदस्यता लेने की अनुमति नहीं देगी। सुरक्षा परिषद को पूर्ण सदस्यता के विपरीत, विशेष दर्जे को मंजूरी नहीं देनी होगी, जिस पर अमेरिका ने वीटो कर दिया है।
भारत ने पहले भी किया था प्रस्ताव का समर्थन
इससे पहले भी भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। भारत की स्थाई प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा था कि हम आशा करते हैं कि उचित समय पर इस पर पुनर्विचार किया जाएगा और संयुक्त राष्ट्र का सदस्य बनने के फिलिस्तीन के प्रयास का समर्थन किया जाएगा। उन्होंने कहा, भारत ऐसे द्विराष्ट्र समाधान का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां फलस्तीनी लोग इजराइल की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित सीमाओं के भीतर एक स्वतंत्र देश में स्वतंत्र रूप से रह सकें।
