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सीरिया के होम्स शहर पर भी विद्रोहियों का कब्जा, भारत सरकार ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी

India Issues Travel Advisory For Syria: भारत सरकार ने कहा है कि सीरिया में वर्तमान में मौजूद भारतीयों से अनुरोध है कि वे अपडेट के लिए दमिश्क में भारतीय दूतावास के आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर (व्हाट्सएप पर भी) और ईमेल आईडी hoc.damascus@mea.gov.in पर संपर्क में रहें।

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सीरिया के अलेप्पो व होम्स शहर पर विद्रोहियों का कब्जा।

Photo : AP

India Issues Travel Advisory For Syria: सीरिया में बिगड़े हालातों के बीच भारत सरकार ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इसमें भारतीय नागरिकों को अगले आदेश तक सीरिया की यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। भारत सरकार की ओर से यह चेतावनी सीरिया में मौजूदा स्थिति के मद्देनजर आई है। दरअसल,इस्लामवादियों के नेतृत्व में विद्रोहियों सीरिया के अलेप्पो व होम्स को काफी हद तक अपने कब्जे में कर लिया है, जिसके बाद हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है।

इस बीच भारत सरकार ने अपने बयान में कहा है कि सीरिया की यात्रा यात्रियों के लिए काफि जोखिम भरी हो सकती है। सीरिया में मौजूदा स्थिति को देखते हुए, भारतीय नागरिकों को अगले आदेश तक सीरिया की यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

दूतावास के संपर्क में रहे भारतीय

भारत सरकार ने कहा है कि सीरिया में वर्तमान में मौजूद भारतीयों से अनुरोध है कि वे अपडेट के लिए दमिश्क में भारतीय दूतावास के आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर (व्हाट्सएप पर भी) और ईमेल आईडी hoc.damascus@mea.gov.in पर संपर्क में रहें। विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति में कहा गया है कि जो लोग ऐसा कर सकते हैं, उन्हें जल्द से जल्द उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों से जाने की सलाह दी जाती है और अन्य लोगों से अनुरोध है कि वे अपनी सुरक्षा के बारे में अत्यधिक सावधानी बरतें और अपनी गतिविधियों को न्यूनतम तक सीमित रखें।

हालातों पर नजर रख रही भारत सरकार

भारत ने कहा है कि वह सीरिया के हालातों पर करीब से नजर रख रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हमने उत्तर सीरिया में हाल में लड़ाई तेज होने पर ध्यान दिया है। हम स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं। सीरिया में लगभग 90 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें से 14 संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न संगठनों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हमारा मिशन हमारे नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार उनसे संपर्क बनाए हुए है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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