US Iran War: अमेरिका-ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष ने कच्चे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर संकट पैदा कर दिया है। ईरान ने गल्फ में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है, जिसकी वजह से तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है।
इसी बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (International Energy Agency) ने एक बड़ी राहत की खबर सुनाई है। आईईए के 32 सदस्य देशों ने मिलकर लगभग 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है, ताकि सप्लाई में आई बाधा को कम किया जा सके।
कच्चे तेल की सप्लाई को बढ़ाना आईईए का उद्देश्य
आईईए के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य संघर्ष और समुद्री मार्गों में खतरे की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इस स्थिति से निपटने के लिए आपातकालीन भंडार से तेल निकालकर बाजार में सप्लाई बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
बता दें कि इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान लगभग 182 मिलियन बैरल तेल जारी किया गया था। ऊर्जा विशेषज्ञों की मानें तो इस कदम से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर करने और सप्लाई संकट को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में युद्ध लंबा चलता है, तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
कच्चे तेल को लेकर भारत को घबराने की जरूरत नहीं
मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम गैस एंड एनर्जी के अधिकारी सुजाता सिंह ने बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि देश के पास अभी हर दिन लगभग 55 लाख बैरल क्रूड ऑयल है. यह सामान्य स्थिति से बेहतर आंकड़ा है।
उन्होंने बताया कि सरकार और तेल कंपनियों ने सप्लाई सोर्स को बढ़ाने का काम किया है और अन्य सोर्स से भी एलएनजी कार्गो खरीदे हैं, ताकि एनर्जी इंपोर्ट बिना किसी रुकावट के जारी रहे। अभी भारत के पास क्रूड ऑयल सप्लाई सुरक्षित बनी हुई है।
उन्होंने यह भी बताया कि अभी देश की डिमांड को पूरा करने के लिए पर्याप्त तेल की सप्लाई मौजूद है। सरकार ने यह भरोसा तब दिखाया है जब पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से समुद्री मार्ग बाधित है और कभी भी सप्लाई बाधित हो सकता है।
