कैसे जनसंख्या पर अंकुश लगाए पाकिस्तान, कंडोम भी नहीं कर पा रहा है सस्ता, IMF से लगा रहा गुहार
- Edited by: शिशुपाल कुमार
- Updated Dec 20, 2025, 08:23 AM IST
IMF ने पाकिस्तान के गर्भनिरोधकों पर 18% GST हटाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। पाकिस्तान सरकार चाहती थी कि जन्म नियंत्रण साधन सस्ते हों ताकि तेजी से बढ़ती जनसंख्या पर काबू पाया जा सके, लेकिन IMF ने कहा कि ऐसी टैक्स छूट पर विचार सिर्फ अगले बजट में किया जा सकता है।
पाकिस्तान में कंडोम है इतना महंगा कि सस्ता करवाने के लिए IMF तक पहुंच गई शरीफ सरकार (फाइल फोटो- AP)
Pakistan: पाकिस्तान अपनी बढ़ती जनसंख्या से परेशान है, लोगों के लिए न तो सही से खाने का इंतजान हो रहा है न और समुचित सुविधा का। कर्जे के जाल में फंसा पाकिस्तान इस कदर बर्बाद हो चुका है कि चाह कर भी कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक वस्तुएं, यहां तक कि सेनेटरी पैड तक को सस्ता नहीं कर पा रहा है। ये वस्तुओं भारी टैक्स के कारण लगातार महंगी होती जा रही हैं।
IMF से पाक की गुहार
पाकिस्तान की तेजी से बढ़ती जनसंख्या और सीमित संसाधनों के बीच सरकार ने जब जन्म नियंत्रण साधनों को सस्ता करने की कोशिश की, तो उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बड़ा झटका मिला। पाकिस्तान सरकार ने गर्भनिरोधकों पर लगे 18 प्रतिशत जनरल सेल्स टैक्स (GST) को हटाने का प्रस्ताव रखा था, ताकि आम लोगों के लिए परिवार नियोजन साधन सुलभ और किफायती बन सकें। लेकिन IMF ने इस प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी देने से साफ इनकार कर दिया।
IMF ने दे दिया झटका
IMF का कहना है कि टैक्स राहत जैसी कोई भी छूट अभी नहीं, बल्कि अगले संघीय बजट के दौरान ही विचार के योग्य है। पाकिस्तान फिलहाल बेलआउट प्रोग्राम के तहत राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने के दबाव में है। ऐसे में IMF का तर्क है कि इस तरह की टैक्स छूट न केवल राजस्व पर असर डालेगी, बल्कि कर प्रणाली के अनुपालन को भी कमजोर करेगी और तस्करी जैसे जोखिम बढ़ा सकती है।
राजस्व का होता नुकसान
पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने वाशिंगटन स्थित IMF कार्यालय से ईमेल और वर्चुअल बैठक के जरिए इस टैक्स छूट के लिए आग्रह किया था। अनुमान था कि टैक्स हटाने से 400 से 600 मिलियन पाकिस्तानी रुपये तक का राजस्व घट सकता है। अंततः IMF ने प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। यही नहीं, IMF ने सेनेटरी पैड और बेबी डायपर पर टैक्स राहत के सुझावों को भी खारिज कर दिया।
संकट में पाक
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान गंभीर जनसंख्या संकट से जूझ रहा है। करीब 2.55 प्रतिशत की जनसंख्या वृद्धि दर के साथ हर साल लगभग 60 लाख लोग बढ़ रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा, बुनियादी सेवाओं और घरेलू आय पर भारी दबाव पड़ रहा है।