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इजराइल ने फिर दिया हिजबुल्लाह को बड़ा झटका, मिसाइल हमले में मारा गया ड्रोन कमांडर सुरूर

Hezbollah Drone Unit Chief Died: हिजबुल्लाह के ड्रोन कमांडर मोहम्मद हुसैन सुरूर ने बेरूत के रिहायशी इलाके के बीच एक अपार्टमेंट इमारत को अपना ठिकाना बनाया था। इजराइल की तरफ से इस इमारत पर तीन मिसाइलें दागी गईं। इन मिसाइलों ने इमारत की उसी मंजिल को निशाना बनाया जहां सरूर छिपा हुआ था।

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इजराइली हमले में मारा गया हिजबुल्लाह का ड्रोन कमांडर।

Photo : Twitter

Hezbollah Drone Unit Chief Died: इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। इजराइल ने एक बार फिर हिजबुल्लाह को बड़ा झटका दिया है। इजराइली आर्मी की तरफ से कहा गया है कि लेबनान के बेरूत में किए गए सटीक हमले में हिजबुल्लाह के ड्रोन कमांडर मोहम्मद हुसैन सुरूर को मार गिराया गया है। हिज्बुल्लाह के मीडिया संगठन अल मायादीन ने भी इसकी पुष्टि की है।

जानकारी के मुताबिक, हिजबुल्लाह के ड्रोन कमांडर ने बेरूत के रिहायशी इलाके के बीच एक अपार्टमेंट इमारत को अपना ठिकाना बनाया था। इजराइल ने इसी इमारत को निशाना बनाया। इजराइल की तरफ से इस इमारत पर तीन मिसाइलें दागी गईं। इन मिसाइलों ने इमारत की उसी मंजिल को निशाना बनाया जहां सरूर छिपा हुआ था। बताया जा रहा है कि इस हमले में हिजबुल्लाह के तीन अन्य लड़ाकों की मौत हो गई है, वहीं कुछ घायल भी हैं।

इजराइल में आतंकी हमलों के पीछे था सरूर का हाथ

इजराइली आर्मी IDF की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सरूर ने इजरायली नागरिकों को निशाना बनाकर कई हवाई आतंकवादी हमलों को अंजाम दिया था। आयरन स्वॉर्ड्स युद्ध के दौरान उसने UAV और विस्फोटक उपकरणों का उपयोग करके इजरायली नागरिकों और IDF सैनिकों के खिलाफ कई आतंकवादी हमले किए। सरूर ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ड्रोन निर्माण परियोजना को भी लीड किया था। इतना ही नहीं वह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल यूनिट का भी इंचार्ज था। साथ ही यमन में हूती विद्रोहियों के साथ बातचीत की जिम्मेदारी भी उसी को दी गई थी।

इजराइल ने ठुकराया युद्ध विराम का प्रस्ताव

इस बीच खबर है कि इजराइल ने अमेरिका की तरफ से लाए गए युद्ध विराम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। इजरायल ने इस बात से इनकार किया कि वह लेबनानी सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह और लेबनानी राजनीतिक दलों के साथ युद्धविराम पर सहमत हो गया है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक इजरायल के विदेश मंत्री इजरायल कैट्ज ने कहा कि उनका देश युद्ध विराम पर विचार नहीं करेगा। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'युद्ध विराम नहीं होगा। देश हिजबुल्लाह के खिलाफ अपनी लड़ाई 'जीत तक और जब तक निवासी उत्तर में अपने घरों में वापस नहीं लौट सकते, तब तक जारी रखेगा।' इससे पहले इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका और सहयोगी देशों ने 21 दिनों के युद्धविराम की अपील की। इजरायली हमलों की वजह से लेबनान में 600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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