दुनिया

हमास ने दो इजरायली बंधकों को किया रिहा, 602 कैदियों को इजरायल करेगा आजाद

Israel-Hamas Deal: इजरायल और हमास के बीच संघर्षविराम के तहत शनिवार को छह इजरायली बंधकों में से दो को रेड क्रॉस को सौंप दिया गया है। दो बंधकों - ताल शोहम (40) और एवेरा मेंगिस्टू (39) को नकाबपोश और हथियारबंद हमास लड़ाके मंच पर लाए और उसके बाद उन्हें रेड क्रॉस की एम्बुलेंस में बैठा दिया गया। इजरायल अब 602 कैदियों को आजाद करेगा।

Image

हमास ने इन दो इजरायली बंधकों को किया रिहा।

Hamas Released two Israeli Hostages: फिलिस्तीनी ग्रुप हमास ने शनिवार को गाजा युद्धविराम समझौते के तहत दो बंधकों - ताल शोहम और एवेरा मेंगिस्टू को रेड क्रॉस को सौंप दिया। आईडीएफ ने दोनों के इजरायल पहुंचने की पुष्टि कर दी है। हमास की ओर से जारी किए गए एक वीडियो में शोहम और मेंगिस्टू को राफा में हमास के वाहनों से बाहर निकलते हुए दिखाया गया। दोनों स्पष्ट रूप से कमजोर दिखाई दे रहे हैं।

हमास ने इन दो इजरायली बंधकों को किया रिहा

आईडीएफ ने एक्स पर पोस्ट किया, "3,812 दिनों के बाद एवेरा और 504 दिनों के बाद ताल घर आ गए।" इजरायल और हमास के बीच बंधकों और कैदियों की रिहाई ऐसे वक्त में हो रही है जब हमास के चरम पंथियों ने अगवा किए गए दो छोटे बच्चों की मां शिरी बिबास के बजाए किसी और का शव सौंप दिया था और इसे लेकर फलस्तीन खफा है।

चार और इजरायली बंधकों को भी 22 फरवरी को ही रिहा किया जाना है। इजरायल आज 602 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करने जा रहा है। बता दें इजरायल और हमास के बीच युद्ध विराम समझौते का पहला चरण 19 जनवरी को लागू हुआ था। इससे पहले हमास की सशस्त्र शाखा अल-कस्साम ब्रिगेड ने इजरायली बंधक शिरी बिबास का शव अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (आईसीआरसी) को सौंप दिया। फिलिस्तीनी ग्रुप के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि इजरायली हवाई हमलों के कारण हुई अराजकता के कारण यह गड़बड़ी हुई, जिसके कारण शवों की गलत पहचान हो गई। हमास अधिकारी ने कहा, "यह अनजाने में हुई गलती थी, क्योंकि जिस क्षेत्र में शिरी का शव रखा गया था, उस क्षेत्र पर इजरायली हमलों के कारण उसका शव अन्य शवों के साथ मिल गया।"

हमास ने इजरायल को सौंपे थे चार बंधकों के शव

गुरुवार को हमास ने चार बंधकों के शव इजरायल को सौंपे थे। इनमें से तीन शवों की पहचान हो गई जबकि चौथा शव, [जिसे शिरी का शव माना जा रहा था] एक अज्ञात महिला का निकला। इज़रायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने बताया कि सौंपे गए चार शवों में से दो की पहचान शिरी के बेटों एरियल और केफिर के रूप में हुई। एक शव ओडेड लिफशिट्ज का था।

आईडीएफ ने कहा कि पहचान प्रक्रिया के दौरान, यह सामने आया कि जो चौथा शव प्राप्त हुआ है, वह शिरी बिबास का नहीं था, और किसी अन्य बंधक से भी उसका कोई मेल नहीं पाया गया। यह एक अनाम, अज्ञात शव है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article