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हमास ने इजरायल की चार महिला सैनिकों को किया रिहा, भीड़ के सामने परेड कराने के बाद रेड क्रॉस को सौंपा

Israel-Hamas Deal: हमास के आतंकवादियों ने गाजा शहर में भीड़ के सामने परेड कराने के बाद चार महिला इजरायली सैनिकों को रेड क्रॉस को सौंप दिया है। इजरायल ने पुष्टि की है कि उसे रिहा की गई बंधकों को रिसीव कर लिया गया है। हमास ने चार इजरायली महिला बंधकों को रिहा किया, तो तेल अवीव में खुशी की लहर देखी जा रही है।

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हमास ने इजरायल की चार महिला सैनिकों को भीड़ के सामने परेड कराने के बाद रेड क्रॉस को सौंप दिया।

World News: हमास ने इजरायल की चार महिला सैनिकों को भीड़ के सामने परेड कराने के बाद रेड क्रॉस को सौंप दिया है, एपी की रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है । हमास ने बंधक बनाई गईं चार इजरायली महिलाओं को रेड क्रॉस को सौंप दिया है। इन चारों की रिहाई गाजा संघर्ष विराम समझौते के तहत हुई। इनकी रिहाई के बदले में इजरायल फिलिस्तीनी कैदियों को मुक्त करेगा।

महिलाओं को एक फिलिस्तीनी वाहन से बाहर निकाला गया

इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने पुष्टि की है कि चारों बंधक रेड क्रॉस के पास हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चारों महिलाओं की रिहाई से पहले गाजा शहर के फिलिस्तीन चौक पर हमास के बंदूकधारी और बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ इक्ट्ठा हो गई। महिलाओं को एक फिलिस्तीनी वाहन से बाहर निकालकर मंच पर लाया गया। उन्होंने मुस्कुराते हुए भीड़ की ओर हाथ हिलाया। फिर वे रेड क्रॉस की गाड़ियों में बैठ गईं।

चारों बंधकों को जैसे ही गाजा में रेड क्रॉस को सौंप गाया, तेल अवीव के एक चौक पर खुशी की लहर दौड़ गई, जहां बंधकों के परिवार और दोस्त जमा हुए थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी स्क्रीन पर चारों की रिहाई को लाइव दिखाया गया और तेल अवीव में लोगों को रोते, मुस्कुराते और एक-दूसरे को गले लगाते हुए देखा गया।

इन चार के बदले इजरायल 200 फिलिस्तीनी बंदियों को करेगा मुक्त

हमास ने जिनको रिहा किया है उनमें - इजरायल के मोशाव येरुहाव की 19 वर्षीय लिरी अलबाग, यरूशलेम की 20 वर्षीय करीना एरीव, मध्य इजरायल के पेटाह टिकवा की 20 वर्षीय डेनियल गिल्बोआ और मध्य इजरायल के राआनाना की 20 वर्षीय नामा लेवी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चारों महिलाएं इजरायली सैनिक हैं, जिन्हें 7 अक्टूबर को हमास के हमले के दौरान इजरायल के नाहल ओज सैन्य अड्डे से ले गाजा ले जाया गया था। वे एक सैन्य निगरानी इकाई की सदस्य थीं। इन चारों के बदले इजरायल 200 फिलिस्तीनी बंदियों को मुक्त करेगा। इजरायल कुल मिलाकर 1800-1900 फिलिस्तीनी बंदियों को रिहा करेगा।

इजरायल और हमास के बाद युद्धविराम में क्या कुछ समझौते हुए?

रविवार को लागू समझौते की शर्तों के तहत, इजरायल ने युद्धविराम के पहले चरण के दौरान गाजा में बंद प्रत्येक इजरायली सैनिक के बदले 50 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करने और किसी भी अन्य महिला बंदी के बदले 30 कैदियों को रिहा करने पर सहमति जाहिर की है। पिछले रविवार को युद्ध विराम लागू होने के बाद से यह कैदियों की दूसरी अदला-बदली होगी। पहले आदान-प्रदान में तीन महिला इजरायली बंधकों और 90 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया गया था।

युद्ध विराम अमेरिका, कतर और मिस्र के नेतृत्व में इजरायल और हमास के बीच कई महीनों तक चली अप्रत्यक्ष वार्ता के बाद संपन्न हुआ। युद्ध विराम समझौते ने उस युद्ध पर विराम लगा दिया जो 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजरायल पर हमले के बाद शुरू हुआ। लगभग 1,200 लोग मारे गए और 251 को बंधक बनाकर वापस गाजा ले जाया गया। 7 अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा पर इजरायल के युद्ध में कम से कम 47,283 फिलिस्तीनी मारे गए और 111,472 घायल हुए हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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