दुनिया

US मिडटर्म चुनाव: संघीय चुनाव आयोग की वेबसाइट पर साइबर हमला, इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग प्रणाली हुई ठप

फेडरल इलेक्शन कमीशन अमेरिका में उम्मीदवारों और राजनीतिक समितियों के खर्च और चंदे का हिसाब-किताब रखता है। चुनाव के अंतिम दिनों में इस तरह की रिपोर्टें सबसे ज्यादा मायने रखती हैं, क्योंकि इन्हीं से पता चलता है कि किस उम्मीदवार या समूह को कहां से कितना पैसा मिल रहा है।

Image

तीन नवंबर को यूएस में है मिडटर्म चुनाव।

Photo : AP

US Midterm Elections : मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले अमेरिका के संघीय चुनाव आयोग (FEC) की वेबसाइट पर साइबर हमला हुआ है, जिससे आयोग की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग प्रणाली ठप हो गई है। यह घटना 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से मात्र एक हफ्ता पहले हुई है, जिससे अमेरिकी राजनीति में हलचल मच गई है। यूएस मिडटर्म के चुनाव नतीजे यूएस कांग्रेस में बहुमत तय करेंगे। चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की यदि हार होती है तो राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप को विधायी काम कराना काफी मुश्किल हो जाएगा।

इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग प्रणाली ऑफलाइन

FEC ने अपने बयान में कहा कि फिलहाल उसकी इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग प्रणाली ऑफलाइन है और आयोग के आईटी विशेषज्ञ सेवा बहाल करने में जुटे हैं। आयोग के स्टेटस संदेश के मुताबिक, सोमवार को पूर्वी समय के अनुसार रात करीब 10 बजे से यह प्रणाली बंद है। हालांकि, उपयोगकर्ता वेबसाइट पर पुरानी रिपोर्टें अब भी खोज सकते हैं।

FEC की भूमिका क्यों अहम है?

फेडरल इलेक्शन कमीशन अमेरिका में उम्मीदवारों और राजनीतिक समितियों के खर्च और चंदे का हिसाब-किताब रखता है। चुनाव के अंतिम दिनों में इस तरह की रिपोर्टें सबसे ज्यादा मायने रखती हैं, क्योंकि इन्हीं से पता चलता है कि किस उम्मीदवार या समूह को कहां से कितना पैसा मिल रहा है। फाइलिंग प्रणाली बंद होने से इन खुलासों में देरी का खतरा पैदा हो गया है।

रिकॉर्ड खर्च के बीच हमला

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब सुपर पीएसी और 'डार्क मनी' समूह चुनाव के आखिरी दिनों में रिकॉर्ड रकम खर्च कर रहे हैं। सुपर पीएसी ऐसे संगठन हैं जो उम्मीदवारों के समर्थन या विरोध में असीमित धन जुटा और खर्च कर सकते हैं, जबकि डार्क मनी समूह अपने दानदाताओं की पहचान उजागर किए बिना चुनावी राजनीति में पैसा लगाते हैं। ऐसे में पारदर्शिता बनाए रखने वाली प्रणाली का ठप होना कई सवाल खड़े करता है।

चुनाव से कांग्रेस में तय होगा बहुमत

इन चुनावों से तय होगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अगले दो वर्षों तक कांग्रेस में अपना बहुमत बरकरार रख पाती है या नहीं। इसलिए हर पक्ष की नजर चुनावी फंडिंग से जुड़ी जानकारी पर टिकी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हमले के पीछे कौन है या इसका मकसद क्या था। आयोग ने सेवा बहाल होने की कोई समय-सीमा भी नहीं बताई है। चुनाव से ठीक पहले किसी सरकारी प्रणाली पर साइबर हमला होना चुनावी सुरक्षा की तैयारियों पर भी सवाल उठाता है। अब देखना यह है कि FEC कितनी जल्दी सेवाएं बहाल करता है और क्या चुनाव से पहले जरूरी वित्तीय खुलासे समय पर सार्वजनिक हो पाते हैं।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

और पढ़ें
End of Article