India GDP Grwoth Rate : भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 8% तक पहुंच गई होती, लेकिन कुछ वैश्विक चुनौतियों ने इसकी रफ्तार पर असर डाला है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता का कहना है कि अगर देश को बाहरी आर्थिक झटकों का सामना नहीं करना पड़ता, तो भारत पहले ही 8% की ग्रोथ वाली इकोनॉमी बन चुका होता। उनके मुताबिक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी सेवाओं में सुधार, मैन्युफैक्चरिंग और बेहतर गवर्नेंस ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत बनाया है।
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक पूनम गुप्ता ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को मुंबई में एक कार्यक्रम हुई चर्चा के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती 7% के आसपास बनी विकास दर को लगातार 8% या इससे ऊपर ले जाने की है। इसके लिए घरेलू आर्थिक मजबूती के साथ-साथ बदलते वैश्विक माहौल के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा।
ग्लोबल हालात सुधरे तो मिलेगा बूस्ट
पूनम गुप्ता के मुताबिक, भारत की ग्रोथ पर बाहरी परिस्थितियों का असर पड़ा है। हालांकि, वैश्विक माहौल में सुधार होने पर देश की आर्थिक विकास दर को अतिरिक्त बढ़त मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक परिस्थितियां बेहतर होती हैं, तो अगले एक साल में ही विकास दर को 50 बेसिस पॉइंट से 1 प्रतिशत अंक तक का अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। यानी वैश्विक दबाव कम होने से भारत के लिए 8% या उससे अधिक की आर्थिक विकास दर हासिल करने का रास्ता आसान हो सकता है।
यह बढ़त किसी एक सरकारी योजना या नीतिगत फैसले से नहीं, बल्कि बेहतर वैश्विक परिस्थितियों के कारण आर्थिक गतिविधियों को मिलने वाले अतिरिक्त समर्थन से आ सकती है।
फिलहाल 3 सबसे बड़ी चुनौतियां
भारत की अर्थव्यवस्था को हाल के वर्षों में कई तरह के बाहरी झटकों का सामना करना पड़ा है। इनमें महंगा कच्चा तेल, अमेरिका की ओर से लगाए गए ऊंचे टैरिफ, मानसून से जुड़ी चुनौतियां और विदेशी निवेशकों की पूंजी निकासी शामिल हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए खास चुनौती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इससे आयात बिल बढ़ने, महंगाई पर दबाव पड़ने और रुपये की स्थिरता प्रभावित होने का जोखिम रहता है।
इसी तरह, कमजोर मानसून कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकता है। वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता का असर निर्यात और निवेश पर भी पड़ सकता है।
अभी कहां से आ रही इकोनॉमी में जान
RBI डिप्टी गवर्नर के मुताबिक, पिछले कई वर्षों में भारत ने अपनी आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता और बेहतर प्रशासन ने अर्थव्यवस्था की क्षमता बढ़ाई है।
इसके अलावा, राज्यों को विकास प्रक्रिया में अधिक महत्वपूर्ण भागीदार बनाने से भी आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिला है। भारत की अर्थव्यवस्था कई क्षेत्रों और अलग-अलग विकास कारकों पर आधारित है। ऐसे में किसी एक सेक्टर या बाजार पर अत्यधिक निर्भरता नहीं होने से बाहरी झटकों का असर संभालने में मदद मिलती है।
पूनम गुप्ता ने कहा कि नीतिगत सुधारों और समय के साथ हुए बदलावों के कारण अर्थव्यवस्था कुछ ऐसे झटकों के प्रति कम संवेदनशील हुई है, जिनका असर पहले अधिक पड़ता था।
8% की ग्रोथ के लिए क्या करना होगा?
भारत को 7% से अधिक की विकास दर बनाए रखते हुए 8% या उससे आगे बढ़ने के लिए कई मोर्चों पर काम करना होगा। इसमें नए और उभरते सेक्टरों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, तकनीकी बदलावों के अनुरूप खुद को तैयार करना, घरेलू निवेश को प्रोत्साहित करना और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) आकर्षित करना शामिल है।
इसके साथ ही, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखना भी जरूरी होगा। भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती केवल मौजूदा ग्रोथ रेट से नहीं, बल्कि इस बात से भी तय होगी कि वह बाहरी झटकों के दौरान अपनी विकास गति को कितना बनाए रख पाती है।
