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Greece Boat Accident: 35 और पाकिस्तानी नागरिकों की मौत की पुष्टि, मृतकों में ज्यादातर नाबालिग; जानें हर अपडेट

World News: ग्रीस वोट हादसे से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। जानकारी के अनुसार 35 और पाकिस्तानी नागरिकों की मौत की पुष्टि कर दी गई है। बताया दया है कि मरने वालों में ज्यादातर नाबालिग हैं। इस मामले में अब तक कम से कम छह मामले दर्ज किए गए हैं और चार संदिग्धों को हिरासत में भी लिया गया है।

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ग्रीस में नाव पलटने की घटना

Boat Accident: ग्रीस में नाव पलटने की घटना में कम से कम 40 पाकिस्तानियों की मौत हो गई। अधिकारियों ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की। हालांकि शुरूआत में बताया गया था कि यूरोप में अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश करते समय डूबने से 5 पाकिस्तानी नागरिक मारे गए। ग्रीक अधिकारियों ने बुधवार को जब बचाव अभियान समाप्त करने की घोषणा की, तो 35 पाकिस्तानियों को मृत घोषित कर दिया गया। पाकिस्तानी नागरिकों को मानव तस्करी रैकेट के जरिए लीबिया के रास्ते अवैध रूप से यूरोप भेजा जा रहा था।

ग्रीस में नाव पलटने की घटना में 40 पाकिस्तानियों की मौत

जानकारी के अनुसार, मृतकों में से अधिकांश नाबालिग या किशोर थे जो पंजाब प्रांत से ताल्लुक रखते थे। इनमें से ज्यादातर सियालकोट, गुजरात, मंडी बहाउद्दीन और नारोवाल जिलों के थे। इस घटना के बाद पाकिस्तान सरकार ने संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के तहत एक विशेष टास्क फोर्स बनाने और देश में मानव तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का फैसला किया। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि पाकिस्तानियों को लीबिया के लिए वीजा जारी किया गया था, जहां से उन्हें नावों पर ग्रीस ले जाया गया था।

इस मामले में अब तक कम से कम छह मामले दर्ज किए गए हैं और चार संदिग्धों को हिरासत में भी लिया गया है।

पिछले साल 260 से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों की हुई थी मौत

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अधिकारियों को मानव तस्करों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। ग्रीस के तट पर नाव पलटने की ताजा घटना अपनी तरह की पहली घटना नहीं है। पिछले वर्ष, ग्रीस के पास अवैध रूप से यूरोप में प्रवेश करने की कोशिश करते समय कम से कम 262 पाकिस्तानी नागरिकों की इसी प्रकार जान चली गई थी। पाकिस्तान में मानव तस्करी के मुद्दे पर कैबिनेट सदस्यों के साथ बैठक के दौरान पीएम शहबाज ने कहा, "ऐसी घटनाएं इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई में सुस्ती के कारण होती है।"

इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि 12-14 साल की उम्र के कई नाबालिग कैसे लीबिया के लिए वीजा पाने में सफल हो गए और पाकिस्तान के एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन काउंटरों से होते हुए अपनी यात्रा पर निकल गए। मानव तस्करी के पूरे नेटवर्क में सरकारी अधिकारियों और संस्थानों पर शामिल होने की चिंता जताई जा रही है।

(Source: IANS)

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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