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गाजा पर टूटा फिर इजरायल का कहर, इजरायली हमले में मारे गए पांच पत्रकार

Israel Hamas War: गाजा पर इजरायली हमले में पांच पत्रकार मारे गए है। इजरायल और हमास के बीच पिछले 14 महीने से जारी युद्ध ने भारी तबाही मचाई है। वहीं इजरायल और हमास के बीच जारी युद्ध के कारण गाजा में कड़ाके की ठंड में तंबू में रहने को मजबूर तीन सप्ताह की एक बच्ची की मौत हो गई ।

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इजरायल के हमले के बाद गाजा का एक क्षेत्र। (फाइल फोटो)

Photo : AP

Israeli attack on Gaza: इजरायल ने गुरुवार को गाजा पर हवाई हमला किया। इस हमले में कई लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। मृतकों और घायलों की संख्या में इजाफा दर्ज किया जा सकता है, क्योंकि बताया जा रहा है कि कई लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं, जिन्हें निकालने की प्रक्रिया जारी है। वहीं, इन मृतकों में पांच पत्रकार भी शामिल हैं, जो अल-अवदा अस्पताल के कवरेज के लिए आए थे। लेकिन, इजरायल के इस हवाई हमले में अस्पताल के आसपास स्थित गाड़ियां भी चपेट में गईं, जिस वजह से वहां मौजूद पत्रकारों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

इजरायली अटैक में 5 पत्रकारों की हुई मौत

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सभी पत्रकार अल-कुद्स अल-यूम टीवी चैनल के लिए काम करते थे, जो अस्पताल के कवरेज के लिए आए थे। लेकिन, इस बीच हमला हो गया, जिसकी जद में आकर सभी को अपनी जान गंवानी पड़ी। फिलिस्तीनी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जिस गाड़ी में हमला हुआ है, वो पत्रकारों की ही थी। उस गाड़ी से सभी पत्रकार रिपोर्टिंग कर रहे थे। फिलहाल, इस हमले को लेकर इजरायल की तरफ से किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं की गई है।

इससे पहले 23 दिसंबर को गाजा पट्टी पर इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 23 फिलिस्तीनी मारे गए थे। सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने डब्ल्यूएएफए के हवाले से बताया था कि रविवार को मूसा बिन नुसायर स्कूल पर इजरायली बमबारी के परिणामस्वरूप तीन बच्चों और दो महिलाओं सहित कम से कम 9 लोग मारे गए थे और कुछ अन्य घायल हो गए थे। इसमें कहा गया था कि गाजा शहर के अल-जला स्ट्रीट पर इजरायली सेना द्वारा एक वाहन पर बमबारी करने पर चार और लोग मारे गए थे।

गोलाबारी में चार बच्चों सहित पांच की मौत

डब्ल्यूएएफए ने एक अलग रिपोर्ट में कहा था कि रविवार सुबह गाजा शहर के उत्तर में जबालिया शहर में इजरायल की गोलाबारी में चार बच्चों सहित पांच नागरिकों की मौत हो गई। डब्ल्यूएएफए ने कहा था कि दक्षिणी गाजा पट्टी में खान यूनिस के पश्चिम में उनके अपार्टमेंट पर इजरायली सेना द्वारा बमबारी में दो लोग मारे गए।

इजरायल और हमास के बीच पिछले 14 महीने से जारी युद्ध ने भारी तबाही मचाई है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायल द्वारा गाजा पर की गई बमबारी और जमीनी हमलों में 45,000 से अधिक फलस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें से आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं। इस युद्ध के कारण गाजा की करीब 23 लाख आबादी में से लगभग 90 प्रतिशत लोगों को कई बार विस्थापित होना पड़ा है।

इजलायली एयर स्ट्राइक में 23 लोगों की मौत

वहीं फिलिस्तीनी सूत्रों ने बताया कि गाजा पट्टी में इजरायली हवाई हमलों में 23 फिलिस्तीनी मारे गए। गाजा में सिविल डिफेंस के प्रवक्ता महमूद बसल ने सिन्हुआ को बताया कि इजरायली विमानों ने उत्तरी गाजा शहर में अल-मुहब्बन स्कूल के अंदर विस्थापित व्यक्तियों के लिए बने टेंट को निशाना बनाया। बसल ने बताया कि नागरिक सुरक्षा दल ने इजरायली हमलों के बाद स्कूल से सात शव और 25 घायल व्यक्तियों को बरामद किया, जिन्हें स्थानीय अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। स्थानीय सूत्र और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टेंट में आग लग गई और बमबारी में कुछ शव क्षत-विक्षत हो गए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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