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कैलिफोर्निया में नौसैनिक एयर स्टेशन के पास F-35 फाइटर प्लेन क्रैश, पायलट सुरक्षित बाहर निकला

एक अमेरिकी नौसेना का F-35C लड़ाकू विमान कैलिफोर्निया के किंग्स काउंटी में लीमोर एयर स्टेशन के पास दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर है ।

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कैलिफोर्निया में F-35 फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त (Photo- Video Grab/@AZ_Intel)

नई दिल्ली: एक अमेरिकी नौसेना का F-35C लड़ाकू विमान कैलिफोर्निया के किंग्स काउंटी में लीमोर एयर स्टेशन के पास दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर है । हालांकि इस हादसे में पायलट सुरक्षित रुप से बाहर निकल गया । यह पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान लगभग शाम 6:30 बजे (स्थानीय समय) दुर्घटनाग्रस्त हुआ।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकल गया है। दुर्घटनाग्रस्त विमान के वीडियो सामने आए हैं, जिसमें मलबे से उठती हुई लपटें और आस-पास फैलता हुआ घना काला धुआं दिख रहा है।

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिसमें नौसेना का हवाला दिया गया है, यह लड़ाकू विमान स्ट्राइक फाइटर स्क्वाड्रन VF-125 को सौंपा गया था, जिसे "रफ रेडर्स" के नाम से जाना जाता है। गौर हो कि VF-125 एक फ्लोट रिप्लेसमेंट स्क्वाड्रन के रूप में कार्य करता है, जो F-35 लड़ाकू विमान का संचालन करने के लिए पायलटों और एयरक्रू को ट्रेनिंग देने के लिए जिम्मेदार है।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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