लोकतंत्र का नियम है, जब नेता हार जाते हैं तो पद छोड़ देते हैं, हालांकि कुछ नेता जब तानाशाह बन जाते हैं तो पहले तो जीतने के लिए हेरफेर करते हैं इसके बाद भी जब हार जाएं तो बलपूर्वक सत्ता हथिया लेते हैं। ऐसे कई उदाहरण दुनिया के सामने आ चुके हैं, ताजा मामला वेनेजुएला का है, जहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने चुनावी हार के बाद भी अपनी जीत घोषित करते हुए राष्ट्रपति पद के लिए शपथ ले ली।
हार के सबूत
न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने शुक्रवार को तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली, जबकि इस बात के ‘‘विश्वसनीय प्रमाण’’ हैं कि उनके प्रतिद्वंद्वी ने हालिया चुनाव में जीत हासिल की है और उनके दमनकारी शासन के खिलाफ देश तथा विदेशों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
मतगणना में हेरफेर
मादुरो ने सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा नियंत्रित नेशनल असेंबली के समक्ष राष्ट्रपति पद की शपथ ली। इसके एक दिन पहले ही विपक्ष की सबसे प्रमुख नेता ने बताया था कि उन्हें सुरक्षा बलों द्वारा कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। सरकार ने इस आरोप का खंडन किया है। वेनेजुएला में संकट तब गहरा गया जब सत्तारूढ़ पार्टी के प्रति समर्थन रखने वाले चुनाव अधिकारियों ने 28 जुलाई को मतदान समाप्त होने के कुछ घंटों बाद मादुरो को विजेता घोषित कर दिया। हालांकि, पिछले राष्ट्रपति चुनावों के विपरीत उन्होंने विस्तृत मतगणना उपलब्ध नहीं कराई।
कहां से मिला सबूत
इस बीच, विपक्ष ने 80 प्रतिशत से अधिक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से ‘टैली शीट’ एकत्र की, उन्हें ऑनलाइन साझा किया और कहा कि ‘टैली शीट’ से पता चलता है कि प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज ने मादुरो को बड़े अंतर से हरा दिया है।
