Bhupender Yadav: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से जुड़ी इस वक्त एक बड़ी खबर आ रही है। खबर है कि भूपेंद्र यादव के तीन बड़े स्टाफ को सरकार ने हटा दिया है। हटाए गए अधिकारियों में मंत्री के निजी सचिव और दो अतिरिक्त निजी सचिव शामिल हैं। ये भूपेंद्र यादव के खास माने जाते थे। हालांकि यह कार्रवाई क्यों हुई है, ये स्पष्ट नहीं है, लेकिन मंत्रिमंडल फेरबदल से पहले ये बदलाव राजनीतिक हलकों में हलचल मचा चुकी है।
मंत्रालय द्वारा 3 जुलाई को जारी किए गए अलग-अलग आदेशों के तहत एक अधिकारी को प्रशासनिक आधार पर मूल काडर में वापस भेजा गया है, दूसरे को समय से पहले 'एक्सटेंडेड कूलिंग ऑफ' के तहत भेजा गया है, जबकि तीसरे अधिकारी की नियुक्ति को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
निजी सचिव अमर सिंह की मूल काडर में वापसी
हटाए गए अधिकारियों में सबसे बड़ा नाम अमर सिंह का है, जो 2010 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस - आयकर) के अधिकारी हैं। वे केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव (PS) के रूप में कार्यरत थे। मंत्रालय के आधिकारिक आदेश के अनुसार, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के 2 जुलाई के कार्यालय ज्ञापन और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद अमर सिंह को "प्रशासनिक आधार" पर उनके मूल काडर यानी राजस्व विभाग में वापस भेज दिया गया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके कर्तव्यों से मुक्त किया जाता है।
अतिरिक्त निजी सचिव शैलेश कुमार सिंह भी हटाए गए
एक अन्य आदेश में, केंद्रीय सचिवालय सेवा (CSS) के अधिकारी शैलेश कुमार सिंह को भी हटा दिया गया है। वे मंत्री के अतिरिक्त निजी सचिव के रूप में तैनात थे। आदेश के मुताबिक, उन्हें 'एक्सटेंडेड कूलिंग ऑफ' के प्रावधान के तहत समय से पहले उनके मूल काडर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में वापस भेज दिया गया है। उन्हें भी तुरंत कार्यमुक्त कर DoPT में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।
सिद्धार्थ यादव की नियुक्ति समाप्त
इसी कड़ी में तीसरे अधिकारी सिद्धार्थ यादव पर भी गाज गिरी है, जो मंत्री के एक और अतिरिक्त निजी सचिव के रूप में काम कर रहे थे। सरकारी आदेश के अनुसार, उनकी सेवाओं को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।
कारण अब भी अज्ञात
केंद्रीय मंत्री के सचिवालय से एक साथ तीन इतने महत्वपूर्ण अधिकारियों का हटाया जाना नौकरशाही के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आधिकारिक आदेशों में केवल "प्रशासनिक आधार" का हवाला दिया है और इस सामूहिक कार्रवाई के पीछे के वास्तविक कारणों का सार्वजनिक रूप से कोई खुलासा नहीं किया है।
