मोदी सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर पिछले एक साल से राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन हर बार इसकी टाइमिंग आगे बढ़ती रही। अब एक बार फिर संकेत मिल रहे हैं कि मंत्रिमंडल का विस्तार संसद के मानसून सत्र के बाद हो सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह सरकार की संसदीय रणनीति और फ्लोर मैनेजमेंट को माना जा रहा है।
सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल मानसून सत्र पर है, जहां कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। इनमें संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे में सरकार पहले संसद में अपने विधायी एजेंडे को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाना चाहती है और उसके बाद कैबिनेट विस्तार पर फैसला ले सकती है।
दो साल पूरे, लेकिन विस्तार अब भी बाकी
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिपरिषद और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें कीं। सरकार के दो साल पूरे होने का अभियान भी पूरा हो गया, लेकिन लंबे समय से चर्चित कैबिनेट विस्तार अभी तक नहीं हुआ।प्रधानमंत्री 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर हैं। इसके बाद 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होगा, जो 13 अगस्त तक चलेगा। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि सरकार चाहती है कि महत्वपूर्ण और संभावित विवादित विधेयकों पर बहस के दौरान अनुभवी मंत्री ही सदन में विपक्ष का जवाब दें। यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार को फिलहाल टाल दिया गया है।
सरकार के सामने कई बड़ी संसदीय चुनौतियां
मानसून सत्र में सरकार कई अहम विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। दूसरी ओर विपक्ष भी पूरी रणनीति के साथ सरकार को घेरने की तैयारी कर चुका है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद, पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण, परीक्षा अनियमितताओं, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और विभिन्न राजनीतिक दलों में हुए विभाजन जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगा।
लोकसभा में बदला राजनीतिक गणित
लोकसभा में संख्या बल को लेकर भी राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदली है। पिछले कुछ महीनों में कई सांसदों के राजनीतिक रुख बदलने के बाद एनडीए की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत बताई जा रही है। हालांकि संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत अभी भी सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार सरकार अतिरिक्त समर्थन जुटाने के साथ-साथ सदन में प्रभावी फ्लोर मैनेजमेंट की रणनीति पर भी काम कर रही है। वहीं विपक्ष का दावा है कि वह सरकार को संविधान संशोधन के लिए जरूरी संख्या तक नहीं पहुंचने देगा।
क्या मानसून सत्र के बाद होगा कैबिनेट विस्तार?
सूत्रों का मानना है कि यदि सरकार मानसून सत्र में अपने प्रमुख विधेयकों को सफलतापूर्वक पारित कराने में सफल रहती है, तो इसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। यह भी माना जा रहा है कि संसद सत्र के दौरान यदि कुछ और सांसद खुलकर एनडीए के समर्थन में आते हैं तो कैबिनेट विस्तार से पहले सरकार का नया राजनीतिक स्वरूप सामने आ सकता है।
फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि मोदी सरकार के लिए कैबिनेट विस्तार से पहले सबसे बड़ी परीक्षा संसद के फ्लोर पर होगी। मानसून सत्र में संख्या बल, रणनीति और विपक्ष की घेराबंदी तीनों पर सरकार की अग्निपरीक्षा होगी। इसी परीक्षा के नतीजे तय करेंगे कि कैबिनेट विस्तार कब और किस स्वरूप में होता है।