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SCO Summit: पाकिस्तान पहुंचे एस जयशंकर, 9 साल बाद किसी भारतीय विदेश मंत्री का पहला PAK दौरा

S Jaishankar Pakistan Visit: विदेश मंत्री एस जयशंकर का पाकिस्तान दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब 9 साल बाद यह किसी भारतीय विदेश मंत्री का पहला पाकिस्तान दौरा है। वह एससीओ समिट में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंचे हैं।

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पाकिस्तान पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर

Photo : ANI

S Jaishankar Pakistan Visit: पाकिस्तान में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO Summit) की बैठक के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। जयशंकर का पाकिस्तान दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब 9 साल बाद यह किसी भारतीय विदेश मंत्री का पहला पाकिस्तान दौरा है। उनका यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है।

बता दें, 15 व 16 अक्टूबर को होने वाली एससीओ समिट की इस बार मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है। बीते महीने अगस्त में पाकिस्तान ने इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्यौता दिया था। हालांकि, बाद में विदेश मंत्रालय ने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समिट में हिस्सा लेंगे और पाकिस्तान में भारत का नेतृत्व करेंगे।

शहबाज शरीफ के डिनर कार्यक्रम में शामिल होंगे जयशंकर

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ डिनर का आयोजन करेंगे, जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शामिल होंगे। इसी के साथ एससीओ समिट का आगाज होगा। बता दें, भारत और पाकिस्तान के बीच बीते कई सालों से जारी तनाव के बीच यह किसी भारतीय विदेश मंत्री की पहली उच्च स्तरीय पाकिस्तान यात्रा है। पाकिस्तान की यात्रा करने वाली भारत की आखिरी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज थीं। उन्होंने अफगानिस्तान पर एक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिसंबर 2015 में इस्लामाबाद की यात्रा की थी।

भारत-पाकिस्तान के बीच नहीं होगी द्विपक्षीय वार्ता

बता दें, एससीओ समिट के इतर भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी प्रकार की द्विपक्षीय वार्ता नहीं होगी। विदेश मंत्रालय इसको लेकर पहले भी बयान जारी कर चुका है। वहीं, विदेश मंत्री जयशंकर ने भी बीते दिनों पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की द्विपक्षीय वार्ता की संभावना से इंकार किया थ। बीते दिनों एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि उनकी यात्रा एक बहुपक्षीय कार्यक्रम के लिए है, मैं वहां भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा करने नहीं जा रहा हूं, मैं वहां एससीओ के एक अच्छे सदस्य के तौर पर जा रहा हूं। बता दें, एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में रूस, चीन, किर्गिज़ गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के राष्ट्रपतियों द्वारा एक शिखर सम्मेलन में की गई थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके स्थायी सदस्य बने।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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