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इजरायल-हमास ने युद्धविराम समझौते पर आया ट्रंप का रिएक्शन, बोले- ये कायम नहीं रखा तो...

Israel-Hamas Ceasefire Agreement: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने शपथ ग्रहण से एक दिन पहले इजरायल और हमास के बीच हुई डील को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि इजरायल-हमास ने युद्ध विराम समझौते को कायम नहीं रखा तो सब कुछ बिगड़ जाएगा। आपको बताते हैं आखिर ट्रंप ऐसा क्यों बोल रहे हैं।

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डोनाल्ड ट्रंप। (Credits: Pixabay)

Donald Trump on Israel-Hamas: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को चेतावनी दी है। इसकी जानकारी उन्होंने खुद दी। उन्होंने एक बार फिर चेतावनी दी कि यदि दोनों पक्ष युद्धविराम-बंधक समझौते को कायम नहीं रखेंगे तो "सब कुछ बिगड़ जाएगा"। ट्रंप ने शनिवार को एनबीसी न्यूज को फोन पर दिए इंटरव्यू में बताया कि वह "जल्द ही" नेतन्याहू से मिलने की योजना बना रहे हैं, लेकिन उन्होंने संभावित बैठक के बारे में अधिक जानकारी शेयर करने से इनकार कर दिया।

गाजा में हमास द्वारा बंधक बनाए गए लोगों के बारे में क्या बोले ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू से कहा कि "इसका अंत होना चाहिए" लेकिन उन्हें "वही करते रहना चाहिए जो उन्हें करना है।" जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें विश्वास है कि समझौते के तहत गाजा में हमास द्वारा बंधक बनाए गए लोगों को रिहा कर दिया जाएगा, तो ट्रंप ने कहा, "सब ठीक है, हम बहुत जल्द ही देखेंगे, और बेहतर होगा कि यह समझौता कायम रहे।" उन्होंने कहा कि अमेरिका समझौते का पालन सुनिश्चित करने के लिए "सम्मान" की मांग करेगा और ऐसा नहीं होने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।

'अगर वे हमारा सम्मान नहीं करते हैं, तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा'

उन्होंने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका को फिर से सम्मान मिलना चाहिए, और उसे जल्द सम्मान मिलना चाहिए। लेकिन सम्मान वह पहला शब्द है जिसका मैं प्रयोग करता हूं।" "अगर वे हमारा सम्मान करते हैं, तो यह कायम रहेगा। अगर वे हमारा सम्मान नहीं करते हैं, तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा।" ट्रंप के भावी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज और उनके भावी मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ ने युद्धविराम समझौते को सुविधाजनक बनाने में बाइडेन प्रशासन के साथ काम किया है, जिसके रविवार को लागू होने की उम्मीद है।

वर्तमान में, 1,904 फिलिस्तीनी कैदियों के बदले में 33 बंधकों को रविवार से रिहा किया जाना है, हालांकि हमास ने अभी तक इजरायल को नामों की सूची नहीं दी है। ट्रंप ने एनबीसी को बताया कि उनका प्रशासन "अच्छी सरकार" के साथ युद्ध विराम समझौता बनाए रखने की पूरी कोशिश करेगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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