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US presidential election: अमेरिकी हिंदुओं ने किसका किया समर्थन? ट्रंप या कमला हैरिस में कौन मार ले गया बाजी

US presidential election: हिंदूज फॉर अमेरिका फर्स्ट के अध्यक्ष और संस्थापक उत्सव संदूजा ने घोषणा की है कि वह राष्ट्रपति पद के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करेगा और डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के खिलाफ अभियान शुरू करेगा।

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डोनाल्ड ट्रंप-कमला हैरिस।

Photo : iStock

US presidential election: अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की सरगर्मी बढ़ती जा रही है। राष्ट्रपति पद के दावेदार डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस एक-दूसरे पर जुबानी जंग कर समर्थन बटोर रहे हैं। इस बीच अमेरिकी हिंदुओं ने खुलेआम ट्रंप के समर्थन का ऐलान कर दिया है। नवगठित संगठन हिंदूज फॉर अमेरिका फर्स्ट ने घोषणा की है कि वह राष्ट्रपति पद के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करेगा और डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के खिलाफ अभियान शुरू करेगा।

हिंदूज फॉर अमेरिका फर्स्ट के अध्यक्ष और संस्थापक उत्सव संदूजा ने गुरुवार को इस निर्णय की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ट्रंप भारत के समर्थक हैं उनके विपरीत हैरिस ने भारत और भारत के लोगों के लिए अपमानजनक बयानबाजियां की हैं। उन्होंने कहा कि बाइडन-हैरिस प्रशासन ने सीमा को सुरक्षित नहीं रखा। हैरिस राष्ट्रपति जो बाइडन के बाद दूसरे नंबर की ताकतवर नेता हैं लेकिन उन्होंने अमेरिका में अवैध प्रवासियों को आने से रोकने के लिए कुछ नहीं किया।

ट्रंप के PM मोदी के साथ अच्छे संबंध

उत्सव संदूजा ने कहा, अवैध तरीके से लोगों के आने पर अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी की घटनाओं में भारी वृद्धि हुई है और इसका असर अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ रहा है, विशेष रूप से कई एशियाई-अमेरिकी कारोबारियों पर। उन्होंने कहा, ट्रंप भारत के समर्थक हैं। उनके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बेहतरीन संबंध हैं और उन्होंने कई रक्षा परियोजनाओं पर सहयोग किया, जिससे भारत को चीन का सामना करने में मदद मिलेगी। संदूजा ने कहा कि इसके उलट कमला हैरिस ने भारत सरकार और भारतीय लोगों के बारे में कई अपमानजनक टिप्पणियां कीं जबकि ट्रंप ने देश के आंतरिक मामलों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया। उन्होंने कहा कि हिंदूज फॉर अमेरिका फर्स्ट जॉर्जिया, उत्तरी कैरोलिना, पेंसिल्वेनिया, मिशिगन, विस्कॉन्सिन, एरिजोना और नेवादा जैसे राज्यों में हिंदू समुदाय के बीच हैरिस के पक्ष में मतदान नहीं करने का अनुरोध करेंगे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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