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डोनाल्ड ट्रंप ने लिया यू-टर्न; गाजा को लेकर अपने पुराने रुख से पलटते हुए कह दी ये बड़ी बात

Donald Trump on Gaza: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी ही बात से पलट गए हैं। उन्होंने गाजा को लेकर अपने रुख को बदल दिया है। अमेरिका का बदला रुख दरअसल बुधवार को कतर में हुई एक अहम बैठक के बाद दिखा। जिसके बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति ने बड़ी बात कही है। गाजा प्लान को लेकर ट्रंप की भारी आलोचना हुई।

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डोनाल्ड ट्रंप

World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने गाजा प्लान को लेकर भारी आलोचना का सामना कर रहे हैं। हालांकि बुधवार को वह अपने पुराने रुख से पलटते नजर आए जब उन्होंने कहा, "कोई भी किसी को गाजा से बाहर नहीं निकाल रहा।"

ट्रंप अब बोले- गाजा से किसी को नहीं निकाला जाएगा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस में आयरिश प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन के साथ अपनी बैठक से पहले कहा कि गाजा से किसी को भी 'निष्कासित' नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, "कोई भी किसी को गाजा से नहीं निकाल रहा है।"

ट्रंप ने गाजा पट्टी को खाली करने और इसे अमेरिकी नियंत्रण में लेकर विकसित करने की योजना पेश की थी हालांकि उनके प्लान की व्यापक आलोचना हुई लेकिन इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इसका समर्थन किया।

कतर में हुई एक अहम बैठक के बाद दिखा बदला रुख

अमेरिका का बदला रुख दरअसल बुधवार को कतर में हुई एक अहम बैठक के बाद दिखा। इस मीटिंग में अरब विदेश मंत्रियों अमेरिका के मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ के साथ गाजा के पुनर्निर्माण पर चर्चा की। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कतर के विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, बैठक में कतर, जॉर्डन, मिस्र, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री और फिलिस्तीन मुक्ति संगठन के महासचिव उपस्थित थे।

मंत्रालय ने कहा, "अरब विदेश मंत्रियों ने गाजा पुनर्निर्माण योजना पर चर्चा की, जिसे 4 मार्च, 2025 को काहिरा में आयोजित अरब लीग शिखर सम्मेलन में मंजूरी दी गई थी।" इसमें कहा गया, "उन्होंने इस क्षेत्र में पुनर्निर्माण प्रयासों के आधार के रूप में इस योजना पर परामर्श और समन्वय जारी रखने के लिए अमेरिकी दूत के साथ सहमति व्यक्त की।"

शनिवार को, 57 सदस्यीय इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) ने सऊदी अरब में एक आपातकालीन बैठक में अरब लीग की प्रस्तावित गाजा योजना को औपचारिक रूप से अपनाया था। मिस्र की ओर से शुरू की गई यह पहल ट्रंप के गाजा प्लान के जवाब में फिलिस्तीनी प्राधिकरण के भावी प्रशासन के तहत गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण का समर्थन करती है। मंगलवार को कतर में गाजा में युद्ध विराम पर वार्ता का एक नया दौर भी शुरू हुआ, जिसमें मध्यस्थता के लिए विटकॉफ को दोहा भेजा गया।

फिलिस्तीनी क्षेत्रों में युद्ध विराम बनाए रखने के महत्व पर दिया जोर

कतर के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, "अरब मंत्रियों ने गाजा और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में युद्ध विराम बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया, दो-राज्य समाधान के आधार पर न्यायपूर्ण और व्यापक शांति प्राप्त करने के लिए वास्तविक प्रयासों की जरूरत पर बल दिया, जिससे फिलिस्तीनी लोगों की स्वतंत्रता और आजादी की आकांक्षाओं की पूर्ति सुनिश्चित हो सके।"

इससे पहले रविवार को, हमास नेतृत्व के राजनीतिक सलाहकार ताहिर अल-नोनो ने कतर की राजधानी में वाशिंगटन के साथ अभूतपूर्व, सीधी बातचीत की पुष्टि की। बातचीत गाजा में सशस्त्र समूह द्वारा पकड़े गए एक अमेरिकी-इजरायली नागरिक की रिहाई पर केंद्रित थी। अल-नोनो ने कहा कि हमास नेताओं और अमेरिका के बंधक वार्ताकार एडम बोहलर के बीच हुई बैठकों में इस बात पर भी चर्चा हुई कि गाजा पर युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से हमास और इजरायल के बीच चरणबद्ध युद्धविराम समझौते को कैसे लागू किया जाए।

बोहलर और हमास के बीच सीधी चर्चा ने वाशिंगटन की दशकों पुरानी नीति को तोड़ दिया, जिसके तहत अमेरिका उन समूहों के साथ बातचीत नहीं करता जिन्हें वह 'आतंकवादी संगठन' कहता है। हमास के प्रतिनिधिमंडल ने भी पिछले दो दिनों में मिस्र के मध्यस्थों से मुलाकात की और इजरायल के साथ युद्ध विराम के अगले चरण पर बातचीत करने के लिए अपनी तत्परता की पुष्टि की, जबकि इजरायल ने युद्ध विराम वार्ता के लिए सोमवार को दोहा में वार्ताकारों को भेजा।

इजरायल ने स्वीकार किया अमेरिकी प्रस्ताव, और किया ये भी फैसला

गाजा युद्ध विराम समझौते का 42-दिवसीय पहला चरण इस महीने की शुरुआत में खत्म हो गया। इजरायल ने घोषणा की कि वह संघर्ष विराम के पहले चरण को रमजान और पासओवर [यहूदी त्योहार] या 20 अप्रैल तक बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन करता है। उसने कहा कि यह प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन के मध्यपूर्व दूत स्टीव विटकॉफ की ओर से आया है।

इजरायल ने न सिर्फ अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है बल्कि गाजा में सभी वस्तुओं की सप्लाई रोकने का भी फैसला किया। हमास ने अस्थायी युद्ध विराम के अमेरिकी प्रस्ताव को स्वाकारने के लिए इजरायल की आलोचना की। फिलिस्तीनी ग्रुप के मुताबिक यहूदी राष्ट्र का यह कदम गाजा युद्ध विराम समझौते के दूसरे चरण के लिए वार्ता को टालने की कोशिश है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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