चीन, अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री टकराव को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। खाड़ी क्षेत्र में जब्त किए गए एक ईरानी मालवाहक जहाज को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जिसमें कथित तौर पर मिसाइल निर्माण से जुड़ी रासायनिक सामग्री होने का दावा किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हमने एक जहाज पकड़ा जिसमें कुछ खतरनाक चीजें थीं… शायद यह चीन की ओर से ‘तोहफा’ था। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके और चीन के राष्ट्रपति के बीच अच्छे संबंध हैं, लेकिन “युद्ध में ऐसा होता है।”
चीन का साफ इनकार
वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब्त किया गया जहाज विदेशी ध्वज वाला है और इसका चीन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों का विरोध करता है और इस मामले में उसका नाम जोड़ना गलत है।
निक्की हेली का आरोप
बता दें कि अमेरिका की पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजदूत निक्की हेली ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि यह जहाज चीन से ईरान जा रहा था। उन्होंने जहाज में मिसाइल निर्माण के लिए केमिकल्स लदे होने का दावा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ईरान की सरकार को मजबूत करने में मदद कर रहा है।
अमेरिकी कार्रवाई से बढ़ा तनाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने ओमान सागर में इस जहाज को रोकने की कोशिश की। आदेश न मानने पर फायरिंग की गई और बाद में अमेरिकी मरीन सैनिकों ने जहाज को अपने कब्जे में ले लिया। इस कार्रवाई को लेकर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सेना ने इसे “समुद्री डकैती” करार देते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका ने जहाज के नेविगेशन सिस्टम को नुकसान पहुंचाया और उस पर सैनिक तैनात कर दिए। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह इस कार्रवाई का जवाब देगा।
टैरिफ की धमकी पर चीन की दो टूक
वहीं, ट्रंप ने चीन पर ईरान को हथियार आपूर्ति करने के आरोपों के बीच भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। इस पर चीन ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि अमेरिका ऐसे कदम उठाता है तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। इस घटना का असर कूटनीतिक स्तर पर भी दिखने लगा है। ईरान ने पाकिस्तान में अमेरिका के साथ प्रस्तावित शांति वार्ता के अगले दौर में भागीदारी की पुष्टि करने से इनकार कर दिया है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया पर अनिश्चितता बढ़ गई है।
