Bilawal Bhutto: पाकिस्तान अपने आपको आतंकवाद से पीड़ित बताता है, ये बात अलग है कि भारत में आतंकवाद(Terrorism in India) बढ़ाने की भूमिका में कमी नहीं आई है। शुक्रवार पांच मई को गोवा में शंघाई सहयोग संगठन(SCO Foreign ministers meeting) के विदेश मंत्रियों की बैठक संपन्न हुई जिसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो हिस्सा लेने के लिए आए थे। अपने संबोधन में उन्होंने तरह तरह की बातें आतंकवाद के संबंध में और अपने मुल्क को क्लीन चिट देते हुए कही। लेकिन विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने अपनी एक लाइन के जरिए जोकि कुछ इस तरह था, आतंकवाद फैलाने वाले और उससे पीड़ित एक मंच पर नहीं बैठ सकते। उन्होंने इस एक लाइन से पाकिस्तान को संदेश दिया कि कथनी और करनी में फर्क नहीं होना चाहिए। बिलावल भुट्टो उस वक्त तो कुछ नहीं बोल पाए। लेकिन जब अपने देश पहुंचे तो कहा कि डॉ एस जयशकंर(Dr S Jaishankar) ने जो कहा वो उनकी इच्छा है। इसके साथ यह भी कहा कि क्या कभी वो खुद किसी आतंकी के साथ भूल से भी बैठे हैं।
'प्रोपगेंडा की वजह से असुरक्षा का भाव'
बिलावल भुट्टो ने कहा कि दरअसल प्रोपगेंडा की वजह से असुरक्षा का भाव है। लेकिन वो प्रोपगेंडा गोवा जाकर टूटा भले ही उन्होंने कुछ नहीं कहा हो। यह सिर्फ भारत के संदर्भ में नहीं बल्कि उन सभी देशों से संबंधित है जो पाकिस्तान को आतंकवाद से जोड़ते हैं। अगर भारत के विदेश मंत्री यह कहते हैं कि पीड़ित और आतंकियों को बढ़ावा देने वालों को एक साथ नहीं बैठना चाहिए तो वह घृणा का भाव है। एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान बिलावल भुट्टो ने कहा कि हमें कूटनीतिक कामयाबी के लिए आतंकवाद को हथियार बनाने के चक्कर में ना फंसे। इस बयान के बाज विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने पलटवार करते हुए कहा कि कोई भी कूटनीतिक कामयाबी के लिए नहीं कर रहा। हम पाकिस्तान का पर्दाफाश राजनीतिक और कूटनीतिक तौर पर कर रहे हैं।
बिलावल भुट्टो को करारा जवाब
डॉ एस जयशंकर ने कहा कि शस्त्रीकरण करना (The weaponisation)यह एक रोचक बयान है, दरअसक इसके जरिए माइंडसेट के बारे में जानकारी मिलती है कि इसका और मतलब क्या है। इसका तो अर्थ साफ है कि जो कुछ आप कर रहे हैं वो वैध और कोई उसे बढ़ावा दे रहा है। आप तकनीक का शस्त्रीकरण कर रहे हो, कुछ लोग कहते हैं कि आप आतंकवाद को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हो, इसका अर्थ यह हुआ कि आप आतंकवाद को वैध मानते हो।क्या हमें आतंकवाद को हथियार नहीं बनान चाहिए। आप के कहने का अर्थ यह है कि पीड़ित के तौर पर हम इस समस्या के साथ रहें। आप एक तरफ आतंकवाद को बढ़ावा दें और दूसरी तरफ कहें कि कुछ ना बोलो।
