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बांग्लादेश: ICT ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को सुनाई फांसी की सजा, लगाए ये 5 बड़े आरोप, हसीना ने दी तीखी प्रतिक्रिया

बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) ने कथित मानवता के विरुद्ध अपराध के मामले में अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ आज फैसला देते हुए मौत की सजा सुनाई। हसीना पर क्या-क्या आरोप लगाए गए जानिए।

Sheikh Hasina

शेख हसीना के खिलाफ आईसीटी में सुनवाई

Death Penalty For Sheikh Hasina: बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) ने कथित मानवता के विरुद्ध अपराध के मामले में अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ आज फैसला सुनाया। ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना के खिलाफ सिलसिलेवार आरोपों को बताते हुए अंत में मौत की सजा सुनाई। हसीना के अलावा बांग्लादेश के विशेष न्यायाधिकरण ने मानवता के विरुद्ध अपराध के लिए पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को मौत की सजा सुनाई। हालांकि ट्रिब्यूनल ने पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को मानवता के विरुद्ध अपराध के लिए पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, शेख हसीना ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। हसीना ने कहा- मृत्युदंड के अपने घृणित आह्वान में वे अंतरिम सरकार के भीतर चरमपंथी लोगों के निर्लज्ज और जानलेवा इरादे को उजागर करते हैं, जो बांग्लादेश के अंतिम निर्वाचित प्रधानमंत्री को हटाना चाहते हैं, और अवामी लीग को एक राजनीतिक ताकत के रूप में खत्म करना चाहते हैं।

78 वर्षीय हसीना पर उस जन-विद्रोह से जुड़े कई आरोप थे, जिसके कारण उन्हें अगस्त 2024 में पद छोड़ना पड़ा था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की एक रिपोर्ट का अनुमान है कि 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच "जुलाई विद्रोह" के दौरान पुलिस की कार्रवाई में 1400 लोग मारे गए थे। शेख हसीना, अपदस्थ अवामी लीग सरकार में उनके गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) या पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून पर न्यायाधिकरण में मुकदमा चलाया गया। पूर्व प्रधानमंत्री हसीना और कमाल पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया और अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया था।

अदालत में सुनवाई के दौरान जजों ने क्या-क्या कहा

आरोप 1: जुलाई के विद्रोह के दौरान हिंसा भड़काना और ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों और अन्य छात्रों की हत्या करना, 100 छात्रों की हत्या करना और हजारों को घायल करना। गोनोभोबन से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर मुक्ति योद्धाओं के पोते-पोतियों को नौकरी नहीं मिलेगी तो क्या रजाकारों के पोते-पोतियों को नौकरी मिलेगी? यह लोगों को दुश्मन के रूप में कलंकित करना है। रजाकारों को फांसी देने के लिए टेलीफोन पर बातचीत की। सहयोगी संगठनों ने ढाका विश्वविद्यालय में प्रदर्शनकारियों पर व्यवस्थित हमले किए, जिसमें 297 छात्र घायल हुए। हिंसा के खिलाफ निवारक और दंडात्मक कार्रवाई करने में विफलता।

आरोप 2: छात्रों और रजाकारों को फांसी देने के लिए ढाका विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति मसूद कमाल से टेलीफोन पर बातचीत की। उन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों को प्रदर्शनकारी छात्रों को मारने के निर्देश दिए और उन्हें गिरफ्तार करने के आदेश भी पारित किए। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से हेलीकॉप्टर और ड्रोन तैनात करके निर्देशों को लागू किया गया और 1400 लोग मारे गए, 2500 लोग घायल हुए।

आरोप 3: प्रदर्शनकारियों ने ढाका कूच की घोषणा की थी। गृह मंत्री पर भी मुकदमा चलाया गया। पुलिस ने छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या कर दी। ये हत्याएं प्रधानमंत्री शेख हसीना की पूरी जानकारी में हुईं।

आरोप 4: प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनकारियों को मारने के लिए हेलीकॉप्टर, ड्रोन और घातक हथियारों का इस्तेमाल किया था। बातचीत वाली पेनड्राइव ट्रिब्यूनल में चला दी गई है।

शेख हसीना और हसनुल इनु के बीच बातचीत - अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने मुझे बताया है कि यह एक आतंकवादी हमला है, इसे आतंकवादी हमला ही मानकर चलिए।

आरोप 5: प्रदर्शनकारियों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन। 16 जुलाई को अबू सईद की हत्या। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का दमन किया गया और अंधाधुंध आग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल किया गया और अंधाधुंध गोलियाँ चलाई गईं। ढाका कूच के दौरान न्यायेतर हत्या।

आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग

आईसीटी-बीडी के मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने पहले आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। पूर्व पुलिस प्रमुख ने व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर मुकदमे का सामना किया लेकिन वह सरकारी गवाह बन गए। आईसीटी-बीडी अध्यक्ष न्यायमूर्ति मोहम्मद गुलाम मुर्तजा मजूमदार ने मामले में जब फैसला सुनाने की तारीख तय की तब मामून कटघरे में खड़े दिखाई दिए। न्यायाधिकरण ने 28 कार्य दिवसों के बाद 23 अक्टूबर को मामले की सुनवाई पूरी की, जब 54 गवाहों ने अदालत के समक्ष गवाही दी कि किस प्रकार पिछले साल ‘जुलाई विद्रोह’ नामक छात्र आंदोलन को दबाने के प्रयास किए गए थे, जिसने पांच अगस्त 2024 को हसीना की अब भंग हो चुकी अवामी लीग सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंका था। राजधानी ढाका में 13 नवंबर को तीन न्यायाधीशों वाले न्यायाधिकरण ने फैसला सुनाने के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की थी।

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अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडल Author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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