बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शाहबाग स्थित ‘प्रोजोनमो छत्तर’ को अचानक ध्वस्त कर दिया गया है, जो 2013 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के युद्ध अपराधियों के खिलाफ चले ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बिंदु रहा था। यह संरचना बांग्लादेश के युवा आंदोलन की पहचान और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन चुकी थी।
आधी रात में बुलडोजर चला
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात को इस ऐतिहासिक ढांचे को बुलडोजर से गिरा दिया गया। स्थानीय चाय दुकानदारों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आधी रात को बुलडोजर आया और तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू हो गई। शाहबाग पुलिस थाना के प्रभारी अधिकारी खालिद मंसूर ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा- "प्रोजोनमो छत्तर को आवास एवं लोक निर्माण मंत्रालय के आदेश पर गिराया गया है। हमें कार्रवाई की पूर्व जानकारी दी गई थी, लेकिन इसका कारण नहीं बताया गया।"
नए ढांचे के निर्माण का दावा
मंसूर ने आगे कहा कि मंत्रालय ने जानकारी दी है कि पिछले वर्ष जुलाई में हुए छात्र आंदोलन से जुड़े नए स्मारक के लिए यह स्थल खाली किया गया है। यह वही विरोध प्रदर्शन है जिसमें, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, 1,400 लोगों की जान गई थी, और जिसका राजनीतिक असर इतना व्यापक था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को 5 अगस्त 2024 को सत्ता छोड़नी पड़ी और भारत में शरण लेनी पड़ी।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक का अंत?
‘प्रोजोनमो छत्तर’ केवल एक स्मारक नहीं था—यह न्याय, सामाजिक चेतना और बांग्लादेश की नई पीढ़ी की आवाज का मंच था। 2013 में यहां हजारों छात्रों और युवाओं ने युद्ध अपराधियों को सज़ा दिलाने की मांग की थी, जिसने देशव्यापी आंदोलन का रूप लिया और अंतरराष्ट्रीय ध्यान भी खींचा। इस संरचना को बिना किसी सार्वजनिक सूचना या जन संवाद के ध्वस्त किया जाना, कई लोगों के लिए गहरी पीड़ा और आशंका का विषय बन गया है। यह घटना बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और सार्वजनिक स्मृति पर नियंत्रण के बढ़ते प्रयासों का संकेत भी मानी जा रही है।
