पश्चिम एशिया में जारी जंग का असर बांग्लादेश पर दिखने लगा है। बांग्लादेश में ऊर्जा और फ्यूल संकट गहराने लगा है, जिसके बाद नई नवेली तारिक रहमान सरकार ने पाबंदियां लगाने की घोषणा कर दी है। बांग्लादेश में ऑफिस से लेकर मॉल तक एक तय समय तक ही खुलेंगे। ताकि देश में मौजूद फ्यूल को बचाया जा सके और ऊर्जा की खपत को कम किया जा सके।
बांग्लादेश में ऑफिस खुलने का नया टाइम क्या?
सरकार ने दफ्तरों के कामकाजी घंटे कम करने और सरकारी खर्च में कटौती करने का फैसला किया है, ताकि बिजली और ईंधन की मांग पर नियंत्रण रखा जा सके। बांग्लादेश ने दफ्तरों का समय सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक तय किया है। ऊर्जा बचाने के उपाय के तौर पर, पूरे बांग्लादेश में सभी दुकानें, रिटेल आउटलेट और शॉपिंग मॉल हर दिन रात 8 बजे तक बंद हो जाएंगे।
ईंधन बचाने के लिए बांग्लादेश क्या-क्या कर रहा है?
- शिक्षा मंत्रालय रविवार से स्कूलों के लिए नए दिशानिर्देश जारी करेगा, जिनमें समय-सारिणी में बदलाव और जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने जैसे विकल्प शामिल होंगे।
- सरकार स्कूलों के लिए इलेक्ट्रिक बसों के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने पर विचार कर रही है, साथ ही इस पहल में शामिल होने वालों को प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।
- ईंधन की कमी से निपटने के लिए बांग्लादेश ने पेट्रोल और डीजल की राशनिंग लागू कर दी है।
- घबराहट में खरीदारी और जमाखोरी को रोकने के लिए वाहनों की बिक्री पर भी सीमाएं तय की गई हैं।
- लंबी कतारों और बढ़ती मांग को देखते हुए ईंधन स्टेशनों के खुलने का समय भी कम कर दिया गया है।
- अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि प्रमुख छुट्टियों के दौरान थोड़ी राहत मिलने के बावजूद, ईंधन की आपूर्ति अभी भी सीमित बनी हुई है।
बांग्लादेश में गहराता जा रहा है ईंधन और ऊर्जा संकट
चूंकि बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध से पैदा हुई कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति की अनिश्चितता का उस पर सीधा असर पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार बांग्लादेश की सरकारी एजेंसियां करीब 17.5 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। वैश्विक बाजार में जारी अस्थिरता को देखते हुए सरकार पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा के नए व वैकल्पिक स्रोतों की खोज पर भी जोर दे रही है। इसी के साथ, बढ़ती ऊर्जा लागत के दबाव को संभालने के लिए सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय सहायता जुटाने की कोशिश कर रही है। ईंधन और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के आयात के भुगतान में मदद के लिए बांग्लादेश ने 2.5 अरब डॉलर से अधिक की बाहरी फंडिंग की मांग की है, क्योंकि लगातार बढ़ती कीमतों से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
