Bangladesh News: बांग्लादेश में एक बार फिर तख्तापलट होने की अफवाह जोर पकड़ रही है। रिपोर्टों में इस बात की आशंका जताई गई है कि सेना मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार का तख्ता पलट और शासन की बागडोर अपने हाथ में ले सकती है। चर्चा इस बात की भी है कि सेना प्रमुख वाकर उज जमां ने सोमवार को शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक की। हालांकि, तख्तापलट से जुड़ी रिपोर्टों एवं अफवाहों को सेना प्रमुख ने खारिज किया है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक सेना प्रमुख जमां ने देश में आपातकाल लागू होने की अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने धैर्य बनाए रखने की अपील की है।
गलत जानकारी फैलाने पर दी कार्रवाई की चेतावनी
सेना प्रमुख ने गलत जानकारी देने पर कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है और देश की सेवा निष्ठा, समर्पण से करने के लिए सैन्य कर्मियों की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। सेना प्रमुख ने ये बातें सोमवार को ढाका कैंटोनमेंट में अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहीं। खास बात है कि इस बैठक में सेना के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। बैठक में जो उपस्थित नहीं हो पाए वे वर्चुअल तरीके से शरीक हुए।
देश में मार्शल लॉ लागू होने की अटकलें
सेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश में एक बार फिर तख्तापलट होने की चर्चा है। रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि देश के ताजा राजनीतिक हालात को देखते हुए आपातकाल या मार्शल लॉ लागू हो सकता है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सेना प्रमुख ने कानून-व्यवस्था सहित कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि सेना ने राजधानी ढाका में बड़ी संख्या में बख्तरबंद वाहनों और बड़ी संख्या में सैनिकों को बुलाया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब बांग्लादेश की सेना और हसीना विरोधी आंदोलन की अगुवाई करने वाले संगठन स्टूडेंट अगेंस्ट्र डिस्क्रिमिनेशन के बीच संबंधों में दरार की खबरें आई है।
बीते पांच अगस्त को हुआ तख्तापलट
दरअसल, पांच अगस्त को बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ। कट्टरपंथी एवं असमाजिक तत्वों ने ढाका स्थित पीएम आवास पर धावा बोल दिया। यह उन्मादी भीड़ प्रधानमंत्री शेख हसीना को मारने पर उतारू थी। हालांकि, समय रहते हसीना वहां से निकल गईं। उन्होंने भारत में शरण ली। इसके बाद बांग्लादेश में हिंदू सहित अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा एवं अत्याचार का सिलसिला शुरू हुआ। हिंदू मंदिर तोड़े गए। उनके घरों पर हमले हुए। आंदोलन छेड़ने वालों ने हसीना को 'तानाशाह' बताया और देश में कथित मुसीबतों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।
अंतरिम सरकार से उठ रहा लोगों का भरोसा
अब हसीना बांग्लादेश में न हसीना हैं और न उनकी सरकार। वहां अंतरिम सरकार है लेकिन इस नई व्यवस्था में भी बांग्लादेश के हालात सुधर नहीं रहे हैं। लोगों का भरोसा मोहम्मद यूनुस की सरकार से उठता जा रहा है। लोगों को हालात पहले से ज्यादा खराब लग रहे हैं। ऐसे में वहां सरकार के खिलाफ एक असंतोष एवं रोष देखने को मिल रहा है। सेना भी इन हालातों को देख रही है। ढाका के आस-पास भारी संख्या में सेना की मौजूदगी किसी बड़े घटनाक्रम की ओर इशारा और अफवाहों को बल दे रही है।
