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श्रीलंका चुनाव में हुआ उलटफेर, वामपंथी नेता अनुरा दिसानायके होंगे अगले राष्ट्रपति

Anura Kumara Dissanayake: श्रीलंका के आम चुनावों में बड़ा उलटफेर हुआ है। वामपंथी नेता अनुरा कुमार दिसानायके जीत करीब हैं। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने अभी तक 52 फीसदी मत हासिल किए हैं। 2022 के आर्थिक संकट और देशव्यापी हिंसा के बाद श्रीलंका में यह पहला चुनाव है।

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श्रीलंका के अगले राष्ट्रपति होंगे अनुरा कुमारा दिसानायके।

Photo : Twitter

Anura Kumara Dissanayake: श्रीलंका के आम चुनावों में बड़ा उलटफेर हुआ है। हिंसा के बाद हुए आम चुनावों में श्रीलंका की जनता ने वामपंथी नेता अनुरा कुमार दिसानायके पर भरोसा जताया है। वह 52 प्रतिशत वोटों के साथ सबसे आगे चल रहे हैं, ऐसे में अनुरा दिसानायके का श्रीलंका का अगला राष्ट्रपति बनना लगभग तय हो गया है।

बता दें, श्रीलंका के 10वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए 21 सितंबर को मतदान हुआ था। वर्ष 2022 के आर्थिक संकट और देशव्यापी हिंसा के बाद श्रीलंका में यह पहला चुनाव है। इस दौरान, सभी 22 निर्वाचन जिलों में कहीं से भी हिंसा या सुरक्षा उल्लंघन की कोई खबर नहीं आई।

चुनाव में हुआ 75 फीसदी मतदान

श्रीलंका में सम्पन्न हुए चुनाव के बाद चुनाव महानिदेशक समन श्री रत्नायक ने बताया कि राष्ट्रपति चुनाव में करीब 75 फीसदी मतदान हुआ, जो नवंबर 2019 में हुए पिछले राष्ट्रपति चुनाव में दर्ज 83 प्रतिशत मतदान से कम होगा। मतदान स्थानीय समयानुसार सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक 22 निर्वाचन जिलों के 13,400 से अधिक मतदान केंद्रों पर हुआ। इस चुनाव में 1.7 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं के मतदान करने की उम्मीद थी, जिसमें सबसे अधिक 38 उम्मीदवार मैदान में थे। इसके बाद शाम करीब 5 बजे से वोटों की गिनती शुरू हुई।

राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने लगाया कर्फ्यू

राष्ट्रपति चुनाव के बाद किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर श्रीलंका में कर्फ्यू लगा दिया गया है। पुलिस ने यह जानकारी दी। राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने एक राजपत्र जारी कर कर्फ्यू आदेश लागू किया। कर्फ्यू की घोषणा ऐसे समय में की गई है जब वोटों की गिनती चल रही है। अभी तक पहले नतीजे घोषित नहीं हुए हैं। बता दें, श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए लगभग 8,000 स्थानीय और विदेशी चुनाव पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई थी। इनमें यूरोपीय संघ, राष्ट्रमंडल देशों और ‘एशियन नेटवर्क फॉर फ्री इलेक्शन्स’ के 116 तथा दक्षिण एशियाई देशों के सात अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक शामिल थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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