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रूस-उत्तर कोरिया के खिलाफ अमेरिका का बड़ा एक्शन, सैन्य उपकरण ट्रांसफर करने वाली कंपनियों पर लगाया बैन

US Sanctions on Russia and North Korea: अमेरिका ने डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) और रूसी बीच सैन्य उपकरणों से जुड़े रूस स्थित पांच व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया है। अमेरिका की ओर से कहा गया है कि दोनों देशों के बीच संबंध वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय परमाणु व्यवस्था के लिए व्यापक खतरा पैदा करते हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन

Photo : Twitter

US Sanctions on Russia and North Korea: अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के साथ-साथ उत्तर कोरिया के खिलाफ भी बड़ा एक्शन लिया है। अमेरिका ने दोनों देशों के बीच सैन्य उपकरण ट्रांसफर करने वाली कंपनियों पर बैन लगा दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर की ओर से कहा गया है कि यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध के बीच उत्तर कोरिया और रूस के बीच सैन्य उपकरणों और घटकों के ट्रांसफर में शामिल होने के लिए अमेरिका ने रूसी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने कहा, दोनों देशों के बीच संबंध वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय परमाणु व्यवस्था के लिए व्यापक खतरा पैदा करते हैं।

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) और रूसी बीच सैन्य उपकरणों से जुड़े रूस स्थित पांच व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया है। बयान में कहा गया है कि रूस ने यूक्रेन पर युद्ध छेड़ने के लिए हथियारों के लिए उत्तर कोरिया पर तेजी से भरोसा किया है और यूक्रेन में उत्तर कोरिया द्वारा आपूर्ति की गई दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।

UNSC के नियमों का किया उल्लंघन

अमेरिका की ओर से कहा गया है कि रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का सीधा उल्लंघन करते हुए उत्तर कोरिया से मिसाइलें आयात कीं। इसमें कहा गया है कि रूस पहले ही 40 से अधिक डीपीआरके-निर्मित बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग यूक्रेन के खिलाफ कर चुका है। इस दौरान अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर रूस के वीटो के प्रयोग की भी निंदा की।

बढ़ रही उत्तर कोरिया और रूस की दोस्ती

बता दें, यूक्रेन में युद्ध छिड़ने के बाद से उत्तर कोरिया और रूस काफी तेजी से करीब आए हैं। इतना ही नहीं उत्तर कोरिया पर आरोप लगे हैं कि यूक्रेन के खिलाफ जंग जारी रखने के लिए उसने रूस को खतरनाक हथियारों की भी सप्लाई की थी। हालांकि, रूस और उत्तर कोरिया ने बार-बार इन आरोपों का खंडन किया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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