दुनिया

ईरान को हटना पड़ेगा पीछे! पश्चिम एशिया में सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा अमेरिका, इजराइल की मदद के लिए भेजी घातक सबमरीन

Middle East Tension: अमेरिका पश्चिम एशिया क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है।अमेरिका ने यूएसएस अब्राहम लिंकन को इस क्षेत्र में यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट विमानवाहक स्ट्राइक ग्रुप की जगह लेने का आदेश दिया है। इस विमान वाहक पोत पर एफ-35 लड़ाकू विमानों के अलावा एफ/ए-18 लड़ाकू विमान तैनात हैं।

Image

US orders submarine to Middle East

Photo : AP

Middle East Tension: ईरान और इजराइल में जंग की आशंका के बीच पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता जा रहा है। इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने पश्चिम एशिया में मिसाइल पनडुब्बी भेजने का आदेश दिया है। इसके साथ ही यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप को और तेजी से इलाके की तरफ बढ़ने का निर्देश दिया है।

ऑस्टिन ने ये आदेश ऐसे समय में जारी किए हैं, जब अमेरिका और उसके सहयोगी तेहरान में हमास नेता इस्माइल हनिया और बेरूत में प्रमुख हिजबुल्ला कमांडर फौद शुकुर की हत्या के बाद क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए इजराइल और हमास के बीच संघर्ष-विराम समझौता कराने की कोशिशों में जुटे हैं। अधिकारियों को इन हत्याओं के बाद ईरान और हिजबुल्ला द्वारा जवाबी हमले किए जाने की आशंका है। यही कारण है कि अमेरिका पश्चिम एशिया क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है।

इजराइल की मदद के लिए सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है अमेरिका

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन के प्रेस सचिव मेजर जनरल पैट राइडर ने एक बयान में बताया कि ऑस्टिन ने इजराइल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट से बात की और इजराइल की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने की अमेरिका की प्रतिबद्धता दोहराई। राइडर के अनुसार, गैलेंट से बातचीत में ऑस्टिन ने बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के मद्देनजर पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य बलों की उपस्थिति और क्षमताओं को मजबूत करने का उल्लेख किया। एशिया प्रशांत क्षेत्र में मौजूद यूएसएस अब्राहम लिंकन को इस क्षेत्र में यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट विमानवाहक स्ट्राइक ग्रुप की जगह लेने का पहले ही आदेश दिया जा चुका है। यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट पश्चिम एशिया से जल्द ही वापस आना शुरू करेगा। ऑस्टिन ने पिछले सप्ताह कहा था कि यूएसएस अब्राहम लिंकन इस महीने के अंत तक सेंट्रल कमांड क्षेत्र में पहुंच जाएगा।

एफ-35 जैसे फाइटर प्लेन से लैस है यूएसएसए अब्राहम लिंकन

यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ऑस्टिन के ताजा आदेश का क्या तात्पर्य है या यूएसएस अब्राहम लिंकन कितनी जल्दी पश्चिम एशिया की ओर बढ़ेगा। इस विमान वाहक पोत पर एफ-35 लड़ाकू विमानों के अलावा एफ/ए-18 लड़ाकू विमान तैनात हैं। राइडर ने यह भी नहीं बताया कि यूएसएस जॉर्जिया गाइडेड मिसाइल पनडुब्बी कितनी जल्दी इस क्षेत्र में पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा कि ऑस्टिन और गैलेंट ने गाजा में इजराइल के सैन्य अभियानों और आम नागिकों को होने वाले नुकसान को कम करने के महत्व पर भी चर्चा की। बता दें, इससे एक दिन पहले फलस्तीन के स्वास्थ्य प्राधिकारियों ने बताया था कि गाजा सिटी में शरणार्थी शिविर में तब्दील एक स्कूल पर शनिवार तड़के हुए इजराइल के हवाई हमले में कम से कम 80 लोगों की मौत हो गई और करीब 50 लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने कहा कि इजराइल और हमास के बीच 10 महीने से जारी युद्ध में यह हमला अब तक के सबसे भीषण हमलों में से एक है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article