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इजरायल ने बेरूत में कैसे की एयर स्ट्राइक? अमेरिका ने कर लिया किनारा, जानें क्या बोले बाइडन

World News: बेरूत उपनगर में इजराइल द्वारा किए गए हवाई हमलों के बाद सवाल उठने शुरू हो गए हैं। जिसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका को बेरूत हमले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। आपको बताते हैं बाइडेन ने क्या कुछ कहा।

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बेरूत हमले पर क्या बोले जो बाइडेन?

Biden on Beirut Attack: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मुताबिक उन्हें बेरूत पर इजरायल की ओर से किए गए हमले की भनक तक नहीं थी। उन्होंने कहा कि वह बेरूत में इजरायल के हवाई हमलों पर टिप्पणी करने से पहले अधिक जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही दोहराया कि अमेरिका इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) के ऑपरेशन में शामिल नहीं था।

अमेरिका को इजरायल के हमले के बारे में नहीं थी जानकारी

बाइडेन ने डेलावेयर में संवाददाताओं से कहा, "हम अभी भी जानकारी जुटा रहे हैं, मैं आपको बता सकता हूं- अमेरिका को आईडीएफ कार्रवाई के बारे में कोई जानकारी नहीं थी या इसमें हमारी कोई भागीदारी नहीं थी। हम अधिक जानकारी एकत्र कर रहे हैं। जब हमारे पास अधिक जानकारी होगी, तो मैं और कुछ कह पाऊंगा।"

सीएनएन ने शुक्रवार को एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि, इजरायल ने ऑपरेशन के शुरू होने और विमानों के उड़ान भरने के बाद अमेरिका को जानकारी दी थी। अधिकारी ने कहा, "हमें इसके बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी और न ही किसी ने पहले हमें सूचित किया था।"

बाइडेन ने किसी भी तरह की टिप्पणी से किया इनकार

एक इजरायली अधिकारी ने सीएनएन को बताया कि यह सूचना हमले से "कुछ देर पहले" भेजी गई थी, और अमेरिका ने इस ऑपरेशन में कोई भूमिका नहीं निभाई थी। बाइडेन से जब पूछा गया कि क्या हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह को निशाने पर रख किए गए हमले (सीएनएन की रिपोर्ट अनुसार) सही ठहराए जा सकते हैं? तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने किसी भी तरह की टिप्पणी से इनकार कर दिया।

उनका जवाब था, "हमें और अधिक जानकारी इकट्ठी करनी होगी।" "मैं इस प्रश्न का उत्तर देने की स्थिति में नहीं हूं।" उन्होंने कहा कि वह संघर्ष के कारण क्षेत्र में बढ़ रहे तनाव को लेकर "हमेशा चिंतित रहते हैं।"

कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर दिया जोर

इससे पहले, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भी शुक्रवार को कहा कि अमेरिका अभी भी बेरूत में इजरायली हमलों के बारे में अधिक जानकारी एकत्रित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम अभी भी जानकारी जुटा रहे हैं, हम जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इरादा क्या था - और जब तक हमारे पास वह जानकारी नहीं आ जाती, हम इस पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दे सकते।

शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने क्षेत्र में तनाव के लिए एक कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर एक बार फिर जोर दिया। ब्लिंकन ने एक समाचार सम्मेलन में कहा कि इजरायल को यह अधिकार है कि अपने बचाव के लिए और बंधक नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने की कोशिश करे लेकिन, "जिस तरह से वह ऐसा कर रहा है, वह मायने रखता है"।

उन्होंने चेतावनी दी कि कूटनीति का अनुसरण न करने से "अधिक संघर्ष, अधिक हिंसा, अधिक पीड़ा और अधिक अस्थिरता और असुरक्षा पैदा होगी, जिसका असर दुनिया भर पर पड़ेगा"। शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने दावा किया कि कूटनीति का मार्ग अभी भी मौजूद है, हालांकि "इस समय इसे देखना मुश्किल लग सकता है"। ब्लिंकन का ये बयान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव को लेकर दिलचस्पी न दिखाने के कुछ दिनों बाद आया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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