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अमेरिका और अन्य देशों ने यूक्रेन में बंद कर दिए अपने दूतावास, सता रहा रूस के हमले का डर

Russia-Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। एक दिन पहले ही रूस ने ये परमाणु हमले की चेतावनी दी थी। ऐसे में रूस के हमले के डर से अमेरिका और अन्य देशों ने यूक्रेन में अपने दूतावास बंद कर दिए हैं। आपको बताते हैं कि किन देशों ने यूक्रेन में अपने दूतावास बंद किए।

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अमेरिका समेत कई देशों ने यूक्रेन में अपने दूतावास किए बंद।

US and Others Shut Embassies in Ukraine: एक दिन पहले ही रूस ने परमाणु हमले की चेतावनी देते हुए ये कहा था कि 'अगर यूक्रेन ने किया पश्चिमी मिसाइलों का इस्तेमाल तो, मॉस्को की तरफ से परमाणु प्रतिक्रिया हो सकती है।' रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच रूस की ओर से संभावित हवाई हमले के बाद इटली, स्पेन और ग्रीस के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका ने यूक्रेन की राजधानी में अपने दूतावास बंद कर दिए।

अमेरिका समेत कई देशों ने यूक्रेन में अपने दूतावास किए बंद

CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'सुरक्षा कारणों' से ग्रीक दूतावास बंद रहा। शहर पर संभावित बड़े हवाई हमले की सूचना मिलने के बाद कीव में स्पेन का दूतावास भी आज बंद रहेगा। इस बीच, टाइम्स ऑफ इज़राइल ने बताया कि इज़राइल कीव में अपना दूतावास बंद नहीं करेगा। यूक्रेन में इज़राइल के राजदूत माइकल ब्रोडस्की ने कहा, 'हम वर्तमान में सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।'

नए हमलों की चेतावनी ऐसे समय में आई है जब मॉस्को पहली बार रूसी क्षेत्र पर अमेरिका द्वारा आपूर्ति की गई लंबी दूरी की मिसाइलों को दागने के लिए यूक्रेन के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने की सोच रहा है और क्रेमलिन ने निवर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन पर युद्ध को लंबा खींचने का आरोप लगाया है।

अमेरिकी मिसाइलों के इस्तेमाल के एक दिन बाद आई रूस की प्रतिक्रिया

रूस ने हाल के दिनों में आवासीय क्षेत्रों और यूक्रेन के ऊर्जा ग्रिड को निशाना बनाते हुए घातक मिसाइल हमलों की लहर पहले ही बढ़ा दी है। पूरे देश में प्रतिदिन हवाई अलर्ट जारी किए जाते हैं। यह चेतावनी यूक्रेन द्वारा युद्ध के 1,000वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के निवर्तमान प्रशासन से मिली नई अनुमति का लाभ उठाते हुए रूसी क्षेत्र पर हमला करने के लिए अमेरिकी ATACMS मिसाइलों का इस्तेमाल करने के एक दिन बाद आई है।

तो क्या अब रूस इन देशों के खिलाफ भी छेड़ेगा जंग?

रूस महीनों से पश्चिम को चेतावनी दे रहा था कि अगर वाशिंगटन यूक्रेन को रूस में अंदर तक अमेरिकी, ब्रिटिश और फ्रांसीसी मिसाइलों को दागने की अनुमति देता है, तो मॉस्को उन नाटो सदस्यों को यूक्रेन में युद्ध में सीधे तौर पर शामिल मानेगा। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अक्टूबर में कहा था कि मॉस्को रूस में अंदर तक अमेरिकी निर्मित हथियारों से यूक्रेन के हमलों का जवाब देगा।

मंगलवार को पुतिन ने पारंपरिक हमलों की एक विस्तृत श्रृंखला के जवाब में परमाणु हमले की सीमा को कम कर दिया, जिसमें आधी सदी से अधिक समय में रूस और पश्चिम के बीच सबसे अधिक तनाव के बीच परमाणु जोखिम बढ़ रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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