Pakistan Afghanistan Border Conflict 2026: पड़ोसी देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद अब एक पूर्ण सैन्य संघर्ष (Open War) का रूप लेता जा रहा है। रविवार को पाकिस्तानी सेना द्वारा अफगान सीमा से सटे इलाकों में चलाए गए भीषण 'बॉर्डर ब्लिट्ज' (Border Blitz) और हवाई हमलों को लेकर सोमवार को अफगानिस्तान की कार्यवाहक तालिबान सरकार ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। तालिबान ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर अफगान धरती पर हवाई हमला करने और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने का गंभीर आरोप मढ़ दिया है।
तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने दी चेतावनी
अफगानिस्तान सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तानी हमलों की पुष्टि करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बताया कि रविवार देर रात पाकिस्तानी वायुसेना के जेट विमानों ने अफगानिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर पक्तिका, पक्तिया और कुनार प्रांतों में भारी बमबारी की। मुजाहिद ने कहा, 'पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन करते हुए आम नागरिकों के रिहायशी इलाकों और घरों को निशाना बनाया है। इस कायरतापूर्ण हमले में महिलाओं और बच्चों समेत दर्जनों निर्दोष लोग हताहत (मृत और गंभीर रूप से घायल) हुए हैं। पाकिस्तान को इस आक्रामकता के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।'
पाकिस्तान की दलील-अफगान धरती से चल रहा है टेरर नेटवर्क
इस विवाद पर पाकिस्तान सरकार का पक्ष पूरी तरह अलग है। सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दोटूक शब्दों में कहा कि यह हमला किसी नागरिक पर नहीं, बल्कि पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने वाले आकाओं के महफूज ठिकानों पर किया गया था। दरअसल, शनिवार रात को पाकिस्तान के कराची शहर में भारी हथियारों से लैस उग्रवादियों ने 'पाकिस्तान रेंजर्स' के प्रांतीय मुख्यालय को निशाना बनाया था, जिसमें 3 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। जवाबी कार्रवाई में मारे गए आतंकियों में से एक हमलावर की पहचान अफगान नागरिक के रूप में हुई थी।
कराची हमले की जिम्मेदारी टीटीपी (TTP) से अलग हुए उग्रवादी गुट 'जमात-उल-अहरार' ने ली थी। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी और उसके सहयोगी संगठनों को अफगानिस्तान की तालिबान सरकार अपने यहां पनाह दे रही है, जहां से वे पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में लगातार सुरक्षा बलों पर खूनी हमले कर रहे हैं।
महीनों से जारी है 'जैसे को तैसा' की जंग
दोनों देशों के बीच पिछले कुछ महीनों से तनाव चरम पर है। इसी साल फरवरी से ही दोनों ओर से भारी मोर्टार दागने और हवाई हमलों का सिलसिला जारी है, जिसमें अब तक दोनों पक्षों के सैकड़ों लड़ाके और सैनिक मारे जा चुके हैं। अप्रैल में चीन और तुर्किये की मध्यस्थता में हुई शांति वार्ता और संघर्ष विराम के प्रयासों के बावजूद दोनों देश एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस ताजा सैन्य कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि डूरंड लाइन (Durand Line) के दोनों ओर फिलहाल शांति स्थापित होना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।
