US Iran Peace Talks: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमान के बाद एक बार फिर पाकिस्तान लौटने की तैयारी में हैं। अराघची का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूतों की पाकिस्तान यात्रा को अचानक रद्द कर दिया है।
मस्कट के बाद फिर इस्लामाबाद पहुंचेंगे अराघची
ईरानी मीडिया और अल जजीरा के अनुसार, विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमान में चर्चा पूरी करने के बाद रूस जाने से पहले फिर से पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं। इससे पहले शुक्रवार और शनिवार को उन्होंने इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से मुलाकात की थी। ईरान ने इस युद्ध को समाप्त करने के लिए एक 'वर्किंग फ्रेमवर्क' पेश किया है, जिसे वह शांति का रास्ता मान रहा है।
ट्रंप का कड़ा रुख
एक तरफ जहां ईरान वार्ता के लिए पाकिस्तान पर भरोसा जता रहा है, वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने शीर्ष वार्ताकारों, जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ की इस्लामाबाद यात्रा को शनिवार को रद्द कर दिया। ट्रंप ने खुद को 'कॉस्ट-कॉन्शियस' बताते हुए 18 घंटे की लंबी और महंगी यात्रा पर सवाल उठाए। इसके अलावा ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरानी पक्ष से कोई बड़ा नेता नहीं बल्कि 'मिड-लेवल' के अधिकारी आ रहे हैं जिनसे मिलना समय की बर्बादी है। साथ ही ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान का नेतृत्व आंतरिक गुटबाजी से जूझ रहा है।
वार्ता रद्द होते ही ईरान ने बदला रुख
ट्रंप ने दावा किया कि उनके द्वारा यात्रा रद्द करने के मात्र 10 मिनट के भीतर ईरान ने एक नया और 'बेहतर' प्रस्ताव भेजा। ट्रंप ने दोहराया, "सौदा बिल्कुल सीधा है, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।" उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका एक मजबूत स्थिति में है और अब बातचीत वाशिंगटन की शर्तों पर होगी।
मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की चुनौतियां
ईरान-अमेरिका संघर्ष को रोकने में पाकिस्तान खुद को एक मुख्य मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसदीय नेतृत्व के बीच इस्लामाबाद में 20 घंटे तक चली मैराथन बैठक बेनतीजा रही थी। अब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के न आने से पाकिस्तान के कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है।
