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टाइटैनिक का मलबा देखने गए पांच अरबपति कौन हैं? दो बाप-बेटे तो Pakistan के अमीरों में हैं शुमार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 22, 2023, 06:25 PM IST

Titan Submersible: पनडुब्बी में चंद घंटे की ही ऑक्सीजन शेष है। अगर समय रहते उसे न ढूंढा गया तो उसमें सवार लोगों के बचने की संभावना काफी कम है। ऐसे में आइए जानते हैं इस पनडुब्बी में सवार पांच अरबपति कौन हैं और वे किस देश के नागरिक हैं।

Titan Submersible: 1912 में अटलांटिक सागर में डूबा टाइटैनिक अब भी लोगों के लिए एक रहस्य बना हुआ है। जहाज का न ही मलबा मिला है और न ही इसमें सवार लोगों का कोई सुराग। समुद्र के नीचे इस जहाज को खोजने के लिए कई अभियान चले, लेकिन पूरे नहीं हुए। अब इस जहाज के मलबे को देखने के लिए टाइटन पनडुब्बी को समुद्र में उतारा गया। इस पनडुब्बी में पांच अरबपति सवार थे।

जैसे ही यह पनडुब्बी समुद्र में उतरी करीब एक घंटे बाद इसका संपर्क टूट गया। अब बीते चार दिनों से इस पनडुब्बी को तलाशा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, पनडुब्बी में चंद घंटे की ही ऑक्सीजन शेष है। अगर समय रहते उसे न ढूंढा गया तो उसमें सवार लोगों के बचने की संभावना काफी कम है। ऐसे में आइए जानते हैं इस पनडुब्बी में सवार पांच अरबपति कौन हैं और वे किस देश के नागरिक हैं।

हामिश हार्डिंग

58 साल के हामिश हार्डिंग ब्रितानी अरबपति हैं और वह यूएई के हामिश हार्डिंग एक्शप ग्रुप के फाउंटर और एक्शन एविएशन के चेयरमैन भी हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, हामिश अंतरिक्ष और एविएशन सेक्टर में रुचि रखते हैं और वह वैज्ञानिकों के जाने-माने क्लब द एक्सप्लोरर क्लब के भी सदस्य हैं।

स्टॉकटन रश

टाइटैनिक का मलबा देखने के गए अरबपतियों में स्टॉकटन रश भी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, रश ओशनगेट कंपनी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं और समुद्र में काम करने वाले लोगों के बीच एक जाना-पहचाना नाम भी हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वह महज 19 साल की उम्र में ट्रांसपोर्ट जेट के पायलट बन गए थे।

पॉल आनरी नार्जेलेट

फ्रांस की नौसेना के पूर्व कमांडर नार्जेलेट भी इस पनडुब्बी में यात्रा करने वालों से एक हैं। वह अंडरवॉटर रिसर्च करने वालों की दुनिया के लिए भी एक बड़ा नाम हैं। 1986 में नार्जेलेट फ्रेंच इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड एक्सप्लॉयटेशन ऑफ द सी से जुड़े इसके बाद ही टाइटैनिक के अवशेषों को ढूंढने का अभियान शुरू हुआ।

शहजादा दाऊद और सुलेमान

शहजादा दाऊद ब्रिटिश कारोबारी हैं और वह पाकिस्तान के सबसे अमरी परिवारों में से भी आते हैं। उनके परिवार की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक, शहजाता दाऊद और उनके बेटे सुलेमान भी टाइटैनिक का मलबा देखने के गई पनडुब्बी में सवार थे। शहजादा दाऊद के बेटे सुलेमान मात्र 19 साल के हैं और यूनिवर्सिटी के छात्र हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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